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हार्डकोर नक्सली रूपी की अंगरक्षक ने छोड़ा माओवाद का साथ, पुलिस के समक्ष किया आत्मसमर्पण

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। रावघाट एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य और इनामी नक्सली रूपी की सुरक्षा गार्ड, रामको मंडावी ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं। रामको ने गुरुवार, 2 अप्रैल को छोटेबेठिया थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण किया।

इस सरेंडर के बाद अब पुलिस की मुख्य प्राथमिकता 8 लाख रुपये की इनामी माओवादी रूपी की गिरफ्तारी है, जो फिलहाल क्षेत्र में सक्रिय बनी हुई है।

उत्तर कांकेर में सिमटता नक्सलियों का दायरा

राज्य सरकार द्वारा नक्सलवाद समाप्ति के लिए तय किए गए लक्ष्यों के बीच, सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव का असर दिखने लगा है। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कांकेर क्षेत्र में अब केवल 14 सक्रिय नक्सली बचे हैं। इनमें मुख्य रूप से एसीएम रूपी और डिवीसीएम चन्दर शामिल हैं।

पुलिस महानिरीक्षक और स्थानीय प्रशासन लगातार नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील कर रहे हैं। हाल के कुछ दिनों में इस अपील का सकारात्मक असर भी दिखा है:

कुल आत्मसमर्पण: हाल ही में 11 नक्सलियों ने सरेंडर किया है।

संगठन का नुकसान: समर्पण करने वालों में उत्तर बस्तर डिवीजन के 6 और आरकेबी डिवीजन के 5 सदस्य शामिल हैं।

इनामी राशि: इन 11 नक्सलियों पर कुल 60 लाख रुपये का संयुक्त इनाम घोषित था।

हथियारों की बरामदगी: सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने 1 AK-47, 3 SLR और 3 303 राइफल जैसे घातक हथियार भी सौंपे हैं।

कौन है मोस्ट वांटेड नक्सली रूपी?

वर्तमान में परतापुर एरिया कमेटी की कमान रूपी के हाथों में है। वह मोहला-मानपुर मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात नक्सली विजय रेड्डी की पत्नी है। पुलिस के अनुसार, रूपी लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का नेतृत्व कर रही है और उस पर 8 लाख रुपये का इनाम है।

“भले ही नक्सलवाद समाप्ति की समय सीमा बीत चुकी हो, लेकिन पुलिस को उम्मीद है कि रूपी और चन्दर जैसे सक्रिय कैडर भी जल्द ही हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करेंगे।”

मुख्यधारा की ओर बढ़ते कदम

कांकेर के कोयलीबेड़ा इलाके में भी सुरक्षा बलों को सफलता मिली है, जहां हाल ही में शंकर और हिडमा नामक दो हार्डकोर नक्सलियों ने सरेंडर किया। इनमें से एक नक्सली अपने साथ एके-47 राइफल लेकर आया था।

क्षेत्र में कंपनी नंबर-5 और परतापुर एरिया कमेटी के कुछ बचे-कुचे सदस्य अभी भी सक्रिय हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। पुलिस का मानना है कि रूपी की सुरक्षा गार्ड के सरेंडर करने से संगठन के भीतर की सूचनाएं मिलने में आसानी होगी, जिससे आने वाले दिनों में और भी बड़ी सफलताएं मिल सकती हैं।

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