दुर्गम पहाड़ियों को चीरकर लोहागांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम : 11 किमी पैदल चलकर ग्रामीणों का किया उपचार

दंतेवाड़ा। बस्तर के सुदूर अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुँचाने की राह में न तो ऊँचे पहाड़ बाधा बन पा रहे हैं और न ही घने जंगल। ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत कुआकोंडा विकासखंड की स्वास्थ्य टीम ने कर्तव्यनिष्ठा की एक नई मिसाल पेश की है। टीम ने बैलाडीला की दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे लोहागांव तक पहुँचने के लिए करीब 11 किलोमीटर का कठिन और पैदल रास्ता तय किया।
हर दरवाजे पर दस्तक, 62 ग्रामीणों की जांच
लोहागांव जैसे कटे हुए इलाके में यह पहली बार था जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इतनी व्यापक स्तर पर जांच शिविर लगाया। इस दौरान गाँव के 62 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
जांच का दायरा: मलेरिया, सिकल सेल (हीमोग्लोबिन), मोतियाबिंद और कुष्ठ रोग जैसे रोगों की सघन स्क्रीनिंग की गई।
विशेष देखभाल: गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की गई और बच्चों का टीकाकरण किया गया।
पहली बार अनुभव: ग्रामीणों के लिए यह एक नया अनुभव था, क्योंकि इनमें से कई लोगों ने जीवन में पहली बार इस तरह की विस्तृत मेडिकल चेकअप कराई थी।
गंभीर मरीजों को मिला तत्काल सहारा
शिविर के दौरान 4 मरीजों की हालत नाजुक पाई गई, जिन्हें समय रहते बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इनमें शामिल हैं:
एक गर्भवती महिला (नियमित प्रसव पूर्व जांच के आधार पर)
दो मलेरिया संक्रमित मरीज
मोतियाबिंद से ग्रसित एक बुजुर्ग
अभियान का उद्देश्य: सेवा अब आपके द्वार
13 अप्रैल से शुरू हुए इस महाभियान के अंतर्गत जिले के 76 चिन्हांकित केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मी घर-घर पहुँच रहे हैं। विभाग का लक्ष्य केवल बीमारों का इलाज करना नहीं, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में छिपे हुए रोगों की समय पर पहचान कर उन्हें मुख्य स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ना है।
लोहागांव तक पहुँचना इस बात का प्रमाण है कि अब स्वास्थ्य सेवाएं अस्पताल में बैठकर मरीज का इंतज़ार नहीं कर रहीं, बल्कि खुद दुर्गम बाधाओं को पार कर जरूरतमंदों तक पहुँच रही हैं। यह पहल बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में प्रशासन के प्रति विश्वास को और मजबूत कर रही है।
















