टॉप न्यूज़

सियासी उलटफेर : राघव चड्ढा समेत ‘आप’ के 7 राज्यसभा सांसदों ने थामा भाजपा का दामन

नई दिल्ली (एजेंसी)। दिल्ली की राजनीति में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम के तहत आम आदमी पार्टी (AAP) को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल सहित कुल सात सांसदों ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने दिल्ली स्थित कार्यालय में इन नेताओं को पार्टी का पटका पहनाकर स्वागत किया।

संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देकर हुआ विलय

भाजपा में शामिल होने से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने इस बड़े कदम की रणनीति साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यसभा में ‘आप’ के कुल सांसदों में से दो-तिहाई सदस्य एक साथ टूटकर अलग हुए हैं। भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के प्रावधानों का उपयोग करते हुए, इस गुट ने खुद का विलय भाजपा में करने का निर्णय लिया है।

केजरीवाल के लिए ‘अस्तित्व’ का संकट

पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए यह घटनाक्रम किसी राजनीतिक भूकंप से कम नहीं है। पिछले कुछ सप्ताह से पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और कद घटाए जाने की चर्चाएं गरम थीं। जानकारों का मानना है कि राघव चड्ढा जैसे भरोसेमंद सिपहसालार का साथ छोड़ना केजरीवाल की लीडरशिप और पार्टी के भविष्य पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

“जिस पार्टी को हमने अपने खून-पसीने से खड़ा किया, वह अब अपने बुनियादी सिद्धांतों और जन-सरोकारों से पूरी तरह भटक चुकी है। जब अपनी ही आवाज दबाई जाने लगे, तो विकल्प चुनना अनिवार्य हो जाता है।” — राघव चड्ढा (भाजपा सदस्यता लेने के दौरान)

इन दिग्गजों ने छोड़ा साथ

भाजपा में शामिल होने वाले सात सांसदों में प्रमुख नाम शामिल हैं:

राघव चड्ढा (प्रमुख रणनीतिकार)

संदीप पाठक (संगठन महामंत्री)

स्वाति मालीवाल (पूर्व DCW अध्यक्ष)

हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)

अशोक मित्तल

राजेंद्र गुप्ता

मोदी के विजन की सराहना

भाजपा में शामिल होते ही राघव चड्ढा के तेवर पूरी तरह बदले हुए नजर आए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर प्रशंसा की। चड्ढा ने कहा कि पीएम मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़े फैसले लेने की क्षमता ने भारत को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने राष्ट्र निर्माण की इस मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया।

पंजाब से लेकर दिल्ली तक पार्टी विस्तार में मुख्य भूमिका निभाने वाले इन चेहरों के जाने से राज्यसभा में आम आदमी पार्टी का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है। यह टूट न केवल राज्यसभा में पार्टी के वजूद को खतरे में डालती है, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए ‘आप’ के सांगठनिक ढांचे को भी कमजोर कर सकती है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button