सुशासन और समावेशी विकास का नया अध्याय

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले लगभग ढाई वर्षों का कार्यकाल शासन की कार्यशैली में एक बड़े बदलाव का गवाह बना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘सुशासन’ के संकल्प को किताबी नारों से निकालकर धरातल पर उतारने का प्रयास किया है। महज 2 साल 4 माह और 17 दिन के छोटे से अंतराल में प्रशासन ने विकास का जो खाका खींचा है, वह प्रदेश के भविष्य की एक उज्ज्वल तस्वीर पेश करता है।
अन्नदाता और वनवासियों का सशक्तिकरण
प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसानों और आदिवासियों के लिए सरकार ने कई निर्णायक कदम उठाए हैं:
धान खरीदी का नया रिकॉर्ड: किसानों का मान बढ़ाते हुए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी सुनिश्चित की गई है। साथ ही 3100 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य निर्धारित कर किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की गई है।
‘हरा सोना’ संग्राहकों को संबल: तेंदूपत्ता संग्राहकों के पारिश्रमिक को बढ़ाकर 5500 रुपये किया गया है। साथ ही, चरण पादुका वितरण जैसी योजनाओं को पुनः जीवित कर आदिवासी समुदायों को राहत पहुंचाई गई है।
जनकल्याण: छत भी और सम्मान भी
मुख्यमंत्री ने पद संभालते ही अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया था:
आवास का सपना: करीब 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को मंजूरी देकर बेघर परिवारों को अपना घर देने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया गया।
महतारी वंदन योजना: राज्य की 70 लाख से अधिक विवाहित महिलाओं के खातों में हर महीने 1000 रुपये की सहायता राशि भेजी जा रही है। यह कदम महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने और परिवार में उनकी भूमिका को सशक्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सुरक्षा और युवा भविष्य पर फोकस
बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में शांति बहाली के लिए केंद्र और राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में 31 मार्च 2026 तक प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
युवाओं के भविष्य को लेकर भी सरकार गंभीर है:
पारदर्शिता: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की जांच के आदेश देकर सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में ईमानदारी सुनिश्चित करने का संदेश दिया है।
खेल प्रतिभाएं: बस्तर और सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजनों के जरिए ग्रामीण अंचलों की प्रतिभाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है।
सुशासन तिहार: सीधे जनता तक पहुंच
प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए 1 मई से 10 जून तक ‘सुशासन तिहार’ का आयोजन किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और मौके पर ही नागरिकों की समस्याओं का निपटारा करना है। केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार के आपसी तालमेल से विकास की गति तेज हुई है, जिसका सीधा लाभ प्रदेश के लगभग तीन करोड़ नागरिकों को मिल रहा है।
निष्कर्ष: अंत्योदय का लक्ष्य
‘बगिया के विष्णु’ के नाम से लोकप्रिय मुख्यमंत्री साय ने ईब नदी से लेकर इंद्रावती के तट तक विकास का जो विज़न पेश किया है, वह समावेशी है। उनका लक्ष्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं को पहुंचाना है। यद्यपि सुशासन का यह सफर अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन किसान, महिला, आदिवासी और युवाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई ये नीतियां प्रदेश में एक स्थायी सकारात्मक परिवर्तन की नींव रख चुकी हैं।
















