छत्तीसगढ़

जशपुर में कृषि क्रांति : बगिया समृद्धि योजना से 13 गांवों की बदलेगी तस्वीर

रायपुर/जशपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के अपने पैतृक गांव बगिया में एक महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना की नींव रखी है। बगिया समृद्धि एम-कैड (M-CAD) योजना के तहत आधुनिक दाबित उद्वहन सिंचाई प्रणाली (Pressurized Lift Irrigation System) का शुभारंभ किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और प्रदेश के कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं और तकनीक

मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को “हर बूंद से अधिक फसल” (Per Drop More Crop) के मंत्र को साकार करने वाला बताया। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक खुली नहरों की जगह अंडरग्राउंड पाइपलाइन का जाल बिछाया जाएगा।

दाबित सिंचाई प्रणाली: सौर ऊर्जा और आधुनिक पंपों के जरिए पानी को सीधे खेतों तक पाइपों से पहुंचाया जाएगा।

तकनीकी प्रबंधन: परियोजना में SCADA और IoT जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे पानी की मात्रा और वितरण को डिजिटल रूप से नियंत्रित किया जा सकेगा, जिससे बर्बादी न्यूनतम होगी।

जमीन की बचत: पाइपलाइन जमीन के नीचे होने के कारण किसानों को अपनी भूमि के अधिग्रहण की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

स्वच्छ ऊर्जा: बिजली की आपूर्ति के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा।

लाभार्थी और विस्तार

मैनी नदी पर निर्मित इस योजना से जशपुर के 13 गांवों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र में साल भर सिंचाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे किसान केवल वर्षा पर निर्भर नहीं रहेंगे।

प्रभावित होने वाले गांव: बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड और ढुढुडांड।

राष्ट्रीय स्तर पर जशपुर की पहचान

मुख्यमंत्री ने गौरव के साथ साझा किया कि भारत सरकार द्वारा देश भर के 23 राज्यों में स्वीकृत 34 एम-कैड परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर एकमात्र चयनित स्थल है।

बजट: परियोजना की कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार ने 95.89 करोड़ रुपये की मदद दी है।

समय सीमा: निर्माण कार्य अगले 6 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य है।

जनभागीदारी: अगले 5 वर्षों तक इसका रखरखाव ठेकेदार करेगा, जिसके बाद जिम्मेदारी जल उपभोक्ता समिति को सौंपी जाएगी। खास बात यह है कि इस समिति में महिलाओं को भी प्रमुख भूमिका दी गई है।

समृद्धि की नई राह

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए “वरदान” बताया। यह मॉडल न केवल जशपुर को राष्ट्रीय मानचित्र पर एक ‘मॉडल एग्री-इरीगेशन डिस्ट्रिक्ट’ के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचाने में भी मील का पत्थर साबित होगा।

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