छत्तीसगढ़

कबीरधाम के वनांचल में सुशासन की नई बयार : अब ‘करोड़पति दीदी’ बनने की ओर बढ़ते कदम

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल में स्थित ग्राम पंचायत लोखान के कमराखोल में हाल ही में एक बेहद आत्मीय दृश्य देखने को मिला। 4 मई को ‘सुशासन तिहार’ के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जब घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव में अचानक पहुंचे, तो ग्रामीण महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता था। यह मिलन महज एक आधिकारिक दौरा नहीं, बल्कि संघर्ष और सफलता की कहानियों को साझा करने का एक मंच बन गया।

आम के पेड़ के नीचे सजी विकास की चौपाल

गांव के एक विशाल पुराने आम के पेड़ की शीतल छांव में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर संवाद किया। इस अनौपचारिक चौपाल में महिलाओं ने अपनी पुरानी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के दौर से लेकर स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने तक के सफर को बेबाकी से साझा किया।

जब मुख्यमंत्री को यह जानकारी मिली कि ‘बिहान योजना’ के माध्यम से इस क्षेत्र की अनेक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, तो उन्होंने उनकी सराहना करते हुए एक नया लक्ष्य दिया। उन्होंने उत्साहवर्धन करते हुए कहा:

“आपकी मेहनत और अटूट विश्वास ने आज आपकी तकदीर बदल दी है। लेकिन यह तो बस शुरुआत है। अब अपनी सोच का दायरा बढ़ाइए और ‘करोड़पति दीदी’ बनने का सपना देखिए। सरकार हर कदम पर आपके साथ है।”

संघर्ष से सफलता की मिसाल: कचरा तेलगाम

चौपाल के दौरान ग्राम कुकदूर की श्रीमती कचरा तेलगाम की कहानी विशेष रूप से प्रेरणादायक रही। उन्होंने बताया कि कैसे बिहान योजना से मिले 2 लाख रुपये के ऋण ने उनके जीवन की दिशा बदल दी:

नया व्यवसाय: उन्होंने शटरिंग प्लेट्स खरीदकर निर्माण क्षेत्र में कदम रखा।

उपलब्धि: वर्तमान में उनके पास 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

आर्थिक मजबूती: इस व्यवसाय से उन्हें सालाना 2.5 से 3 लाख रुपये की आय हो रही है।

श्रीमती तेलगाम का कहना है कि अब वे न केवल घर संभालती हैं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और भविष्य की बचत की जिम्मेदारी भी बखूबी उठा रही हैं। मुख्यमंत्री के अपनेपन ने उनके भीतर और आगे बढ़ने का हौसला भर दिया है।

सशक्त नारी, सशक्त समाज

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर दोहराया कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता सुदूर क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उनका मानना है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से सक्षम होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है।

कबीरधाम के वनांचलों में आम की छांव तले शुरू हुआ यह संवाद अब एक आंदोलन का रूप ले रहा है। ‘लखपति’ से ‘करोड़पति’ बनने का यह संकल्प बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में विकास की एक नई इबारत लिख रहा है।

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