सुशासन तिहार : गांवों तक पहुंच रही सरकार, किसानों की उम्मीदों को मिल रहे नए पंख

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में ‘सुशासन तिहार’ का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य प्रशासन को सीधे जनता के द्वार तक ले जाना है। इन विशेष शिविरों के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों और जरूरतों का न केवल पंजीकरण किया जा रहा है, बल्कि उनका त्वरित निराकरण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। शासन की इस संवेदनशीलता ने आम जनमानस में एक नया भरोसा जगाया है।
जनसमस्या निवारण शिविर: एक प्रभावी माध्यम
सुशासन तिहार के तहत आयोजित होने वाले शिविरों ने सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता को कम कर दिया है। जहाँ पहले लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, अब प्रशासन स्वयं उनके गांव पहुँच रहा है।
त्वरित समाधान: मांगों और समस्याओं का मौके पर ही निपटारा।
सीधा संवाद: ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच की दूरी कम हुई।
पारदर्शिता: योजनाओं का लाभ सीधे पात्र व्यक्तियों तक पहुँच रहा है।
सफलता की कहानी: किसान प्रकाश सिंह की बदली किस्मत
कोरबा जिले के ग्राम जेंजरा के निवासी श्री प्रकाश सिंह गोंड इस पहल के सकारात्मक बदलाव का जीवंत उदाहरण हैं। प्रकाश सिंह एक मेहनती किसान हैं, जो अपनी 5 एकड़ भूमि पर पारंपरिक खेती के जरिए परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
“सीमित संसाधनों के कारण खेती में कई चुनौतियां थीं, लेकिन सुशासन तिहार ने मेरी राह आसान कर दी।”
— प्रकाश सिंह गोंड
तत्काल सहायता: धनरास में आयोजित शिविर में प्रकाश सिंह ने सिंचाई की समस्या रखी।
साधन का हस्तांतरण: उनकी मांग पर शासन द्वारा उन्हें तत्काल 2 एचपी का मोटर पंप उपलब्ध कराया गया।
आर्थिक मजबूती: अब वे आधुनिक सिंचाई के माध्यम से धान के साथ-साथ अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ा सकेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
प्रकाश सिंह जैसे हजारों हितग्राहियों का मानना है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार अब फाइलों से निकलकर खेतों और खलिहानों तक पहुँच गई है। समय पर मिली इस सहायता ने न केवल किसानों का आत्मविश्वास बढ़ाया है, बल्कि राज्य में सुशासन की अवधारणा को भी चरितार्थ किया है।
















