आधुनिक खेती और सरकारी मदद से किसान महेश कश्यप ने रची सफलता की नई इबारत

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में खेती की नई मिसाल पेश करते हुए कछार गांव के किसान महेश कश्यप ने साबित कर दिया है कि अगर सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो मिट्टी सोना उगल सकती है। परंपरागत खेती के पुराने ढर्रे को छोड़कर उन्होंने उद्यानिकी (Horticulture) को अपनाया और आज वे क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं।
चुनौतियों से अवसरों तक का सफर
एक समय था जब महेश कश्यप भी अन्य किसानों की तरह पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। लागत का बढ़ना और मुनाफा कम होना उनके लिए चिंता का विषय था। बदलाव तब आया जब उन्होंने उद्यानिकी विभाग की ‘समेकित उद्यानिकी विकास योजना’ के बारे में जाना। विभाग के सहयोग से उन्होंने अपनी खेती के तरीके को पूरी तरह वैज्ञानिक और आधुनिक बना लिया।
उन्नत तकनीक और नवाचार का संगम
महेश ने अपने 2 हेक्टेयर के क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी आय बढ़ाने के लिए निम्नलिखित आधुनिक पद्धतियों को अपनाया:
ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation): पानी की बर्बादी कम करने और पौधों की जड़ों तक सीधे पोषण पहुँचाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया।
मल्चिंग (Mulching): मिट्टी की नमी बरकरार रखने और खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए मल्चिंग शीट का प्रयोग किया।
जैविक खाद का उपयोग: मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए उन्होंने रासायनिक खादों की जगह वर्मी कंपोस्ट और जैविक खाद पर जोर दिया।
अनुदान सहायता: विभाग की मदद से उन्हें फेंसिंग और पौधरोपण के लिए आर्थिक अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे शुरुआती लागत का बोझ कम हो गया।
लागत और मुनाफे का गणित
महेश कश्यप ने करीब 4.5 एकड़ भूमि पर बैंगन और कद्दू जैसी सब्जियों की खेती की। उनके हालिया उत्पादन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
विवरण, अनुमानित आंकड़े
कुल उत्पादन,900 से 1100 क्विंटल
खेती की लागत,₹7 से ₹8 लाख
शुद्ध मुनाफा,₹14 से ₹15 लाख
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
महेश की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। वे अब आसपास के किसानों को भी आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनका मानना है कि सटीक मार्गदर्शन और वैज्ञानिक खेती के जरिए कृषि को एक बेहद लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। बिलासपुर के ग्रामीण अंचल में महेश की यह कहानी समृद्धि की एक नई परिभाषा लिख रही है।
















