छत्तीसगढ़ में ईंधन की किल्लत : पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भारी भीड़, कई जिलों में स्टॉक खत्म

रायपुर। छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर मची अफरा-तफरी ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित ईंधन संकट की खबरों के बीच, प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
अफवाहों और डर के कारण बढ़ी मांग
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के मद्देनजर ईंधन की कमी की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि सरकार की ओर से सावधानी बरतने की अपील की गई थी, लेकिन छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में इसे लेकर डर का माहौल बन गया। लोग भविष्य की चिंता में अपनी जरूरत से कहीं ज्यादा ईंधन स्टोर करने लगे हैं, जिसके कारण बालोद, जगदलपुर, धमतरी और गुरुर जैसे क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ गई है।
बालोद जिले में गहराया संकट
ईंधन की कमी का सबसे अधिक असर बालोद जिले में देखा जा रहा है। जिले की वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार है:
स्टॉक की कमी: जिले के कुल 76 पेट्रोल पंपों में से लगभग 10 पंप पूरी तरह खाली हो चुके हैं।
नो स्टॉक के बोर्ड: जिला मुख्यालय के प्रमुख पंपों (जैसे संतोष और झलमला पंप) पर “डीजल समाप्त” के बोर्ड लगा दिए गए हैं।
परिवहन पर असर: ट्रकों और बसों के पहिए थमने की कनौबत आ गई है क्योंकि चालकों को घंटों भटकने के बाद भी ईंधन नहीं मिल पा रहा है।
प्रशासन और संचालकों के सख्त कदम
भीड़ को नियंत्रित करने और कालाबाजारी रोकने के लिए पेट्रोल पंप संचालकों ने कड़े नियम लागू किए हैं:
खुले में बिक्री पर रोक: केन, बोतलों या ड्रमों में पेट्रोल-डीजल देने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील: बस्तर संभाग के जगदलपुर सहित अन्य शहरों में प्रशासन लोगों को समझा रहा है कि वे घबराकर अतिरिक्त स्टॉक न करें।
जरूरत से ज्यादा भंडारण (Panic Buying) की वजह से उन लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है जिन्हें वास्तव में तत्काल यात्रा या आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन की आवश्यकता है। अधिकारियों का मानना है कि यदि लोग सामान्य रूप से ईंधन लेना शुरू कर दें, तो आपूर्ति व्यवस्था जल्द ही पटरी पर लौट आएगी।
















