छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास की नई पहल : ‘जी राम जी’ अधिनियम से बदलेगी गांवों की सूरत

रायपुर। देश के ग्रामीण इलाकों में रोजगार और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने ‘विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025’ को मंजूरी दे दी है। यह नया कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे भारत में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा, जो मौजूदा मनरेगा व्यवस्था की जगह लेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस ऐतिहासिक बदलाव को राज्य में जमीनी स्तर पर उतारने की प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का विजन: “आर्थिक मजबूती का नया सवेरा”

इस नए अधिनियम का स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में यह कानून एक निर्णायक कदम साबित होगा।

“छत्तीसगढ़ जैसे खेती-किसानी पर निर्भर राज्य के लिए साल में 125 दिन के पक्के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलना हमारे ग्रामीण परिवारों के लिए एक वरदान है। इससे गांवों में आर्थिक स्थिरता आएगी। हमारी सरकार पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ इस व्यवस्था को लागू करेगी ताकि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को इसका सीधा लाभ मिल सके।”
— श्री विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री

नए कानून की मुख्य बातें और ग्रामीणों को मिलने वाले फायदे

इस नई रोजगार व्यवस्था में ग्रामीण परिवारों को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं:

काम के दिनों में बढ़ोतरी: अब ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का अकुशल श्रम करने का कानूनी अधिकार मिलेगा। यह पहले के मुकाबले 25% अधिक है।

ऐतिहासिक बजट: केंद्र सरकार ने साल 2026-27 के लिए इस योजना के तहत 95,692.31 करोड़ रुपये का बड़ा बजट आवंटित किया है। राज्यों के हिस्से को मिलाकर कुल खर्च 1.51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान है।

समय पर भुगतान और मुआवजा: मजदूरी का पैसा सीधे मजदूरों के बैंक खातों में (DBT के जरिए) हर हफ्ते या मस्टर रोल बंद होने के अधिकतम 15 दिनों के भीतर भेज दिया जाएगा। भुगतान में देरी होने पर मजदूरों को हर्जाना (विलंब क्षतिपूर्ति) दिया जाएगा।

बेरोजगारी भत्ता: यदि आवेदन करने के बाद तय समय सीमा के भीतर काम नहीं दिया जाता है, तो संबंधित प्रशासन को श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता देना होगा।

पंचायतों को ज्यादा ताकत: ग्राम पंचायतों को अब अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से काम चुनने के अधिक अधिकार होंगे, जिससे गांवों में जल संरक्षण और कृषि से जुड़े स्थायी निर्माण कार्यों को मजबूती मिलेगी।

पुरानी व्यवस्था से नई व्यवस्था में बदलाव के नियम

प्रशासन और मजदूरों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए संक्रमण काल को बेहद सुगम बनाया गया है:

पुराने जॉब कार्ड रहेंगे मान्य: जब तक नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ बनकर तैयार नहीं हो जाते, तब तक मनरेगा के तहत ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापित पुराने कार्ड पूरी तरह वैध रहेंगे।

चल रहे काम नहीं रुकेंगे: 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी विकास कार्य बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे और 1 जुलाई से वे अपने आप नई व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे।

नया रजिस्ट्रेशन: नए श्रमिकों के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर ही आसानी से पंजीकरण कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का मार्ग होगा प्रशस्त

यह नया अधिनियम सिर्फ एक रोजगार योजना मात्र नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत को स्वावलंबी और उत्पादक बनाने का एक बड़ा अभियान है। छत्तीसगढ़ में इसके प्रभावी अमल से गांवों के बुनियादी ढांचे, जल संवर्धन और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे, जो राज्य को तेजी से एक विकसित प्रदेश बनाने की ओर ले जाएंगे।

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