छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मियों के लिए घर से काम करने की उठी मांग, ईंधन बचत का दिया हवाला

रायपुर। देश में ईंधन संरक्षण और अनावश्यक यात्राओं पर रोक लगाने के बढ़ते प्रयासों के बीच, छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा ऊर्जा बचाने की अपील के बाद, विभिन्न राज्यों के मंत्रियों और जन प्रतिनिधियों ने अपने आधिकारिक वाहनों के काफिले को छोटा करना शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ में भी कई मंत्रियों ने इस दिशा में कदम उठाते हुए अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या सीमित कर दी है।
इसी सिलसिले में, अब राज्य के कर्मचारी संगठनों ने भी एक नई पहल की मांग की है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मुख्य सचिव को एक औपचारिक पत्र सौंपा है। इस पत्र में वैश्विक स्तर पर ईंधन की अनिश्चितता और बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से कार्य) की नीति लागू करने का आग्रह किया गया है। संगठन का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में ऊर्जा का संचय करना बेहद अनिवार्य हो गया है।
डिजिटल सिस्टम से राह आसान
फेडरेशन ने तर्क दिया है कि चूंकि राज्य के सरकारी विभागों में पहले से ही ‘ई-ऑफिस’ और डिजिटल (पेपरलेस) कार्यप्रणाली पूरी तरह सक्रिय है, इसलिए अधिकांश प्रशासनिक कामकाज ऑनलाइन निपटाए जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में, नया रायपुर स्थित मंत्रालय और अन्य महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालयों में जरूरत के हिसाब से ‘वर्क फ्रॉम होम’ की व्यवस्था शुरू करना पूरी तरह व्यावहारिक और व्यावहारिक रूप से संभव है।
ईंधन की बचत और पर्यावरण को लाभ
कर्मचारी संघ का कहना है कि हर दिन बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी अपने निजी या सरकारी वाहनों से नया रायपुर स्थित दफ्तरों में आते-जाते हैं। अगर सप्ताह में कुछ दिनों के लिए भी घर से काम करने की अनुमति दी जाती है, तो इससे न केवल भारी मात्रा में पेट्रोल-डीजल की बचत होगी, बल्कि सड़कों पर यातायात का दबाव और पर्यावरण प्रदूषण भी काफी कम होगा।
दिल्ली का उदाहरण: छत्तीसगढ़ में यह मांग तब और तेज हो गई है जब हाल ही में दिल्ली सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सप्ताह में दो दिन घर से काम करने का आदेश जारी किया है। इसी तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ के सरकारी गलियारों में भी इस व्यवस्था को अपनाने की बहस छिड़ गई है।
















