छत्तीसगढ़ में त्रिस्तरीय पंचायतें होंगी आर्थिक रूप से समृद्ध : जिला पंचायतों को भी मिलेगा माइनिंग रॉयल्टी में हिस्सा

रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब राज्य में मुख्य खनिजों के साथ-साथ गौण खनिजों (Minor Minerals) से मिलने वाली रॉयल्टी का एक हिस्सा जिला पंचायतों को भी आवंटित किया जाएगा। इस संबंध में राज्य शासन द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय पंचायत दिवस के मौके पर आयोजित एक प्रदेश स्तरीय समारोह में रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष नवीन कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सामने यह मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने उसी समय मंच से इस पर अपनी सहमति दी थी, जिसे अब अमलीजामा पहना दिया गया है।
इस तरह होगा रॉयल्टी की राशि का नया बंटवारा
खनिज साधन विभाग के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, गौण खनिजों से होने वाली कुल कमाई का 33 फीसदी हिस्सा पहले की तरह ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पास जाएगा। वहीं, बची हुई 67 फीसदी राशि को ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत के बीच नीचे दिए गए स्लैब के आधार पर बांटा जाएगा:
7.50 लाख रुपये तक की राशि: यह पूरी रकम (100%) सीधे ग्राम पंचायत के खाते में जाएगी।
7.50 लाख से 10 लाख रुपये तक: इसमें से 80% हिस्सा ग्राम पंचायत को, जबकि 10-10% हिस्सा जनपद और जिला पंचायत को मिलेगा।
10 लाख से 25 लाख रुपये तक: ग्राम पंचायत को 70% और जनपद व जिला पंचायत दोनों को 15-15% राशि दी जाएगी।
25 लाख से 50 लाख रुपये तक: इसमें ग्राम पंचायत की हिस्सेदारी 60% होगी, जबकि जनपद और जिला पंचायत को 20-20% फंड मिलेगा।
50 लाख रुपये से अधिक की राशि: इस स्लैब में ग्राम पंचायत को 50% और जनपद व जिला पंचायत दोनों को 25-25% की बराबर हिस्सेदारी मिलेगी।
बुनियादी सुविधाओं और प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर खर्च होगा पैसा
सरकार ने इस फंड के इस्तेमाल के नियमों को भी आसान और व्यापक बना दिया है। अब इस राशि का उपयोग ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को सुधारने के लिए किया जा सकेगा, जैसे:
सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में पानी की निरंतर आपूर्ति (रनिंग वाटर सुविधा)।
सामुदायिक शौचालयों और मुक्तिधामों का निर्माण।
गांवों को जोड़ने वाली संपर्क सड़कों और सार्वजनिक वाचनालयों (Libraries) की स्थापना।
इसके साथ ही, जिला पंचायतों को जो फंड मिलेगा, उसे मुख्य रूप से उन क्षेत्रों के विकास पर खर्च किया जाएगा जो सीधे तौर पर खनन (Mining) गतिविधियों के कारण प्रभावित होते हैं।
“गांवों के विकास को मिलेगी नई रफ्तार”
इस फैसले पर बात करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि उनकी सरकार गांवों को आत्मनिर्भर और पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिला पंचायतों को खनिज निधि में शामिल करने से स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को तेजी से लागू किया जा सकेगा।
सरकार के इस त्वरित फैसले पर रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन कुमार अग्रवाल सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने खुशी जाहिर की है। उनका मानना है कि इस कदम से न सिर्फ पंचायतों का कामकाज बेहतर होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों का बुनियादी ढांचा भी मजबूत होगा।
















