छत्तीसगढ़

डिजिटल भू-अभिलेख : छत्तीसगढ़ के जशपुर में कल से फटे-पुराने सरकारी नक्शों को बदलने का महाअभियान

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में ज़मीनी दस्तावेज़ों को ज़्यादा पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर, जशपुर जिले में 15 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक ज़मीन के नक्शों को सुधारने और नया करने (मैप रिन्यूएशन) का एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में जिला कलेक्टर रोहित व्यास ने पूरा शेड्यूल (रोस्टर) जारी कर दिया है और सभी ज़िम्मेदार अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने की हिदायत दी है।

इस ढाई महीने के अभियान के दौरान जशपुर के 27 राजस्व निरीक्षक (RI) मंडलों में सालों पुराने और खराब हो चुके नक्शों की जांच की जाएगी। प्रशासन ने कुल 766 गांवों की 2,456 नक्शा शीटों की स्क्रूटनी करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 214 गांवों की बेहद जर्जर हो चुकी 710 नक्शा शीटों को पूरी तरह नया रूप दिया जाएगा।

शेड्यूल के मुताबिक, इस मुहिम की शुरुआत 15 जुलाई को मनोरा और आस्ता मंडलों से होगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से जशपुर, कुनकुरी, बगीचा, पत्थलगांव और सन्ना समेत जिले के सभी 27 मंडलों को कवर करते हुए 30 सितंबर तक काम पूरा कर लिया जाएगा।

निगरानी और रिपोर्टिंग की सख्त व्यवस्था

काम में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख को सीधे तौर पर मॉनिटरिंग की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर ने साफ किया है कि पटवारियों और आरआई को न सिर्फ नियमों के तहत नक्शों में सुधार करना होगा, बल्कि हर महीने की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी राज्य के भू-अभिलेख कार्यालय को भेजनी होगी।

आम जनता को क्या होगा फायदा?

सालों पुराने नक्शों के अपडेट होने से ज़मीन की सीमाओं को लेकर होने वाले विवाद खत्म होंगे। इसके अलावा ज़मीन का सीमांकन (नापी), नामांतरण (Mutation) और रिकॉर्ड दुरुस्त कराने जैसे कामों के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और ये काम बेहद आसान और तेज़ हो जाएंगे।

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