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चिकित्सा अनुसंधान में क्रांतिकारी बदलाव की ओर भारत : 2047 तक बजट में 6 गुना से अधिक बढ़ोतरी का रोडमैप

नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में जानलेवा और गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार चिकित्सा अनुसंधान (हेल्थ रिसर्च) के क्षेत्र में एक बड़ा ढांचागत बदलाव करने जा रही है। नई ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति-2026’ के मसौदे (ड्राफ्ट) के अनुसार, वर्ष 2047 तक स्वास्थ्य अनुसंधान पर होने वाले खर्च को मौजूदा बजट से लगभग 6.25 गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

वर्तमान में भारत अपनी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का महज 0.024% हिस्सा इस क्षेत्र पर खर्च करता है। नई योजना के तहत इसे वर्ष 2037 तक बढ़ाकर 0.072% और आजादी के शताब्दी वर्ष यानी 2047 तक 0.15% करने का खाका तैयार किया गया है।

कागजी शोध नहीं, धरातल पर इलाज पहुंचाना है मकसद

सरकार ने साफ किया है कि अब अनुसंधान का उद्देश्य केवल रिसर्च पेपर छापने तक सीमित नहीं रहेगा। असली ध्यान इस बात पर होगा कि शोध के जरिए नई दवाएं, टीके (वैक्सीन), आधुनिक डायग्नोस्टिक किट और किफायती इलाज आम जनता तक कितनी तेजी से पहुंच रहे हैं। आने वाले समय में मुख्य फोकस देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर रहेगा, जिनमें शामिल हैं:

कैंसर, टीबी और हृदय रोग

मधुमेह (डायबिटीज) और मानसिक स्वास्थ्य

कुपोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य

संक्रामक रोग, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) और बुजुर्गों से जुड़ी बीमारियां

मेडिकल कॉलेजों को बनाया जाएगा रिसर्च हब

इस नीति के तहत देश के चिकित्सा संस्थानों के बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाएगा:

लैब का अपग्रेडेशन: वर्तमान में काम कर रही ‘वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब’ (VRDL) को अपग्रेड करके अब ‘इन्फेक्शियस डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैब’ (IRDL) में बदला जाएगा। इसके बाद वायरस के साथ-साथ बैक्टीरिया, फंगस और अन्य परजीवियों से होने वाली बीमारियों पर भी व्यापक शोध हो सकेगा।

नेटवर्क का विस्तार: देश के मेडिकल कॉलेजों में ‘मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट्स’ (MRU) का दायरा बढ़ाया जाएगा।

ICMR की भूमिका: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के संस्थानों को इस पूरे नेटवर्क की रीढ़ बनाया जाएगा, जिन्हें अत्याधुनिक तकनीकों से लैस कर राज्यों के साथ तालमेल मजबूत किया जाएगा।

स्वदेशी तकनीक और एआई (AI) पर जोर

नई नीति में स्टार्टअप्स, प्राइवेट इंडस्ट्री, मेडिकल कॉलेजों और रिसर्च सेंटर्स को एक साथ लाकर देश में ही स्वदेशी मेडिकल डिवाइस, वैक्सीन और दवाओं के निर्माण को रफ्तार देने का प्रस्ताव है। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीनोमिक्स, डिजिटल हेल्थ डेटा और नेशनल डिजीज रजिस्ट्री जैसी आधुनिक तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा।

बदलेगा सफलता को मापने का पैमाना

अब किसी भी रिसर्च की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि वह कितनी पत्रिकाओं में छपी है, बल्कि इसके लिए एक नया मूल्यांकन ढांचा ‘ICMR-IRIS’ तैयार किया जा रहा है। इसमें देखा जाएगा कि शोध से मरीजों को कितना सीधा फायदा मिला और क्या उससे सरकारी स्वास्थ्य नीतियों में कोई सुधार आया।

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से भी अपील की है कि वे स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए अपने स्तर पर विशेष फंड का गठन करें। तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए इस पूरे निवेश की समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी।

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