छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों से की आत्मीय मुलाकात, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधरोपण

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कोंडागांव जिले के बड़ेकनेरा ग्राम में ‘सुशासन तिहार’ के मौके पर स्थानीय निवासियों और वन विभाग की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, वनाधारित रोजगार को बढ़ावा देने और बच्चों की शिक्षा को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधे भी लगाए।

लेख का पुनर्गठित और मौलिक रूप नीचे दिया गया है:

छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य ग्रामीण स्वावलंबन: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बड़ेकनेरा में हितग्राहियों से जाना योजनाओं का जमीनी असर
कोंडागांव (छत्तीसगढ़)। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कोंडागांव जिले के ग्राम बड़ेकनेरा का दौरा कर वन विभाग की विभिन्न योजनाओं से जुड़े हितग्राहियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासकीय योजनाओं का मूल उद्देश्य केवल बजटीय आवंटन नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के सम्मानजनक साधन, बेहतर शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की ठोस बुनियाद तैयार करना है। मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहकों, महिला स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों, प्रगतिशील किसानों और मेधावी छात्र-छात्राओं से मुलाकात कर उनके अनुभवों और जीवन में आए बदलावों को साझा किया।

वनांचल में आजीविका और महिला सशक्तीकरण की नई कहानियां

मुख्यमंत्री ने अपने प्रवास के दौरान ग्रामीण परिवारों के घरों में जाकर व्यक्तिगत संवाद किया, जिसके प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:

आर्थिक संबल बनती वन संपदा: मुख्यमंत्री सबसे पहले तेंदूपत्ता संग्राहक श्रीमती वेदबती यादव के निवास पहुंचे। श्रीमती यादव ने बताया कि इस सीजन में उन्होंने 3720 गड्डी तेंदूपत्ता एकत्र कर 20,460 रुपये की आय प्राप्त की है, जो उनके परिवार के लिए वित्तीय स्थिरता का एक बड़ा जरिया बन चुका है।

महिला उद्यमिता को बढ़ावा: वन धन विकास केंद्र मर्दापाल से जुड़ी मां शीतला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती विमला भोयर ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि उन्होंने महज एक महीने में 85 किलोग्राम तीखुर का प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) कर लगभग 85 हजार रुपये की कमाई की है। मुख्यमंत्री ने मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण उद्यमिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

पारंपरिक स्वागत: ग्रामीणों और हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत अंचल के पारंपरिक जामुन, आम और तीखुर से बने शरबत से किया।

शिक्षा को संबल और कृषि का एकीकृत मॉडल

मुख्यमंत्री ने शिक्षा को भविष्य का आधार बताते हुए छात्रवृत्ति योजनाओं के महत्व को रेखांकित किया:

सपनों को मिली उड़ान: तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार की प्रतिभावान बेटी राजबती मंडावी ने कक्षा 12वीं में 75% से अधिक अंक अर्जित किए हैं। उन्हें ‘तेंदूपत्ता हितग्राही छात्रवृत्ति योजना’ के तहत 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। मुख्यमंत्री ने राजबती की इस सफलता की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य की पढ़ाई के लिए शुभकामनाएं दीं।

खेती और मत्स्य पालन का समन्वय: बड़ेकनेरा के किसान श्री गौतम यादव के खेत पहुंचकर मुख्यमंत्री ने उनके द्वारा किए जा रहे मक्का उत्पादन और तालाब में मत्स्य पालन के एकीकृत मॉडल का निरीक्षण किया। किसान ने बताया कि ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ और ‘कृषि उन्नति योजना’ जैसी योजनाओं के एकमुश्त लाभ से उनकी आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बड़ेकनेरा में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण किया। उन्होंने आम जनता से प्रकृति की रक्षा के लिए इस अभियान को एक जनआंदोलन का रूप देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पेड़ न केवल हमारे वर्तमान पर्यावरण को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन और समृद्धि की गारंटी भी हैं।

विभिन्न वन परिक्षेत्रों में हितग्राहियों को सहायता राशि का वितरण

कार्यक्रम के दौरान वन विभाग की कल्याणकारी योजनाओं के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लाभार्थियों को सहायता और लाभांश राशि सौंपी गई:

वन परिक्षेत्र,योजना का नाम / लाभ,विवरण / वितरित सामग्री

मर्दापाल परिक्षेत्र,किसान वृक्ष मित्र योजना,”दो किसानों को 5,500 नीलगिरी के पौधों का वितरण”
,छात्रवृत्ति एवं सामाजिक सुरक्षा,विद्यार्थियों को 25-25 हजार रुपये की स्कॉलरशिप और राजमोहिनी देवी सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 3 परिवारों को कुल 6.30 लाख रुपये की सहायता
बड़ेडोंगर परिक्षेत्र,किसान वृक्ष मित्र व लाभांश,”किसानों को 2,500 नीलगिरी पौधे, वन प्रबंधन समिति कमेला को 8.46 लाख रुपये का लाभांश और तेंदूपत्ता संग्रहण राशि का भुगतान”
नारंगी परिक्षेत्र,संग्रहण भुगतान व प्रोत्साहन,”एक संग्राहक को 21,873 रुपये 50 पैसे का भुगतान तथा मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति का वितरण”

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि वन आधारित अर्थव्यवस्था अब छत्तीसगढ़ के गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष व कोंडागांव विधायक सुश्री लता उसेंडी, केशकाल विधायक श्री नीलकंठ टेकाम, जिले की कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे।

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