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अचानक आने वाला कार्डियक अरेस्ट : सही समय पर सही कदम बचा सकता है जान

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। रास्ते में चलते हुए, ऑफिस में काम करते हुए या किसी पार्टी के दौरान अचानक किसी की तबीयत बिगड़ जाना और उसका बेहोश हो जाना बेहद डरावना अनुभव हो सकता है। ऐसे आपातकालीन हालातों में घबराने के बजाय यह जानना बेहद जरूरी है कि हमारी पहली प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए, क्योंकि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में एक-एक सेकंड कीमती होता है।

मशहूर टीवी अभिनेता ऋतुराज सिंह के 59 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट के कारण हुए आकस्मिक निधन ने एक बार फिर इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या पर चर्चा बढ़ा दी है।

क्या होता है कार्डियक अरेस्ट?

यह दिल से जुड़ी एक बेहद गंभीर और जानलेवा स्थिति है। इसमें हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों (विशेषकर मस्तिष्क) तक ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति रुक जाती है। चूंकि यह बिना किसी चेतावनी के अचानक होता है, इसलिए यदि मरीज को तुरंत चिकित्सीय सहायता न मिले, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

शुरुआती 5 मिनट हैं सबसे महत्वपूर्ण (गोल्डन ऑवर)

कार्डियक अरेस्ट आने पर शुरुआती 5 मिनट का फर्स्ट एड (प्राथमिक चिकित्सा) मरीज के बचने की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे समय में आस-पास के लोगों का संयम बनाए रखना और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है।

मुख्य लक्षण जिन्हें पहचानना जरूरी है:
अचानक बेहोश होकर गिर जाना।

नब्ज (पल्स) का पूरी तरह बंद हो जाना।

सांस लेने में रुकावट आना या सांस का रुक जाना।

इससे ठीक पहले सीने में बेचैनी, कमजोरी, सांस फूलना या दिल की धड़कन का अनियमित होना महसूस हो सकता है।

आपात स्थिति में क्या करें? (विशेषज्ञ की सलाह)

पुणे के रूबी हॉल क्लीनिक के सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल पाटिल के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट के लक्षण कभी पहले से दिखाई देते हैं और कभी बिल्कुल सामने नहीं आते। यदि आपके सामने ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो तुरंत ये कदम उठाएं:

तुरंत मदद बुलाएं: सबसे पहले एम्बुलेंस या आपातकालीन मेडिकल टीम को कॉल करें।

सीपीआर (CPR) शुरू करें: यदि मरीज की सांस और नब्ज बंद है, तो बिना समय गंवाए उसकी छाती के बीच में तेजी से और गहराई से कंप्रेशन (हथेली से दबाना) देना शुरू करें।

एईडी (AED) का उपयोग: यदि आस-पास ‘ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर’ मशीन उपलब्ध हो, तो उसका इस्तेमाल करें।

नोट: किसी भी मरीज की जान बचाने के लिए घबराहट को खुद पर हावी न होने दें, बल्कि सूझबूझ से काम लें।

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