संगीत में ऑटो-ट्यून के इस्तेमाल पर सोनू निगम का बड़ा बयान: बोले—”हाँ, मैं भी करता हूँ यूज़, लेकिन…”

मुंबई (एजेंसी)। मशहूर ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा के लोकप्रिय पॉडकास्ट ‘गेम चेंजर्स: द म्यूज़िक सीरीज़’ के नए एपिसोड में बॉलीवुड के दिग्गज गायक सोनू निगम ने शिरकत की। इस ख़ास बातचीत के दौरान उन्होंने संगीत उद्योग में आए तकनीकी बदलावों और विशेषकर ‘ऑटो-ट्यून’ (pitch-correction software) के इस्तेमाल पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए।
ऑटो-ट्यून पर क्या है सोनू निगम की राय?
दशकों से अपनी सुरीली आवाज़ और सख्त शास्त्रीय रियाज़ के लिए पहचाने जाने वाले सोनू निगम ने स्वीकार किया कि वे भी अपने कुछ गानों में ऑटो-ट्यून का प्रयोग करते हैं। उन्होंने तकनीक के इस दौर का समर्थन करते हुए कहा:
“ऑटो-ट्यून के आने से काफ़ी बदलाव आए हैं। कई लोग इसकी आलोचना करते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि जो हुआ अच्छा हुआ। हम भाग्यशाली हैं कि हमने बिना ऑटो-ट्यून के कठिन रियाज़ किया है, इसलिए हमें इसकी अत्यधिक ज़रूरत नहीं पड़ती। लेकिन आधुनिक दौर की आवश्यकताओं को देखते हुए मैं भी अपने कुछ गानों में इसका इस्तेमाल करता हूँ।”
लाइव ऑर्केस्ट्रा से डिजिटल दौर तक का बदलाव
सोनू निगम ने बताया कि पहले के समय में लाइव सारंगी और स्ट्रिंग्स जैसे वाद्यों के साथ रिकॉर्डिंग होती थी, जहाँ थोड़ा-बहुत पिच का अंतर प्राकृतिक लगता था।
डिजिटल दौर का प्रभाव: आज का पूरा म्यूज़िक प्रोडक्शन डिजिटाइज़्ड है और एक तय फ्रीक्वेंसी (440) पर सेट रहता है। ऐसे में यदि गायक की आवाज़ पूरी तरह ट्यून नहीं होगी, तो वह ट्रैक से अलग सुनाई देगी।
ऑटो-ट्यून के सही इस्तेमाल का दिया सुझाव
सोनू निगम ने ऑटो-ट्यून के सीमित और ज़िम्मेदाराना इस्तेमाल पर ज़ोर दिया:
फिनिशिंग टच के लिए: गायक को अपनी ओर से 99% सही गाना चाहिए और केवल अंतिम 1% की फिनिशिंग के लिए ऑटो-ट्यून का सहारा लेना चाहिए।
ग़ैर-गायकों पर तंज़: इसका इस्तेमाल ऐसे लोगों की आवाज़ सुधारने के लिए नहीं होना चाहिए जो गाना जानते ही नहीं।
एक्टर्स द्वारा इस्तेमाल: यदि अभिनेता शौकिया तौर पर गानों में इसका इस्तेमाल करते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं, लेकिन वे कभी पेशेवर गायकों का स्थान नहीं ले सकते।
यह पॉडकास्ट एपिसोड यूट्यूब पर उपलब्ध है, जहाँ दर्शक भारतीय संगीत जगत के दिग्गजों के अनसुने किस्से सुन सकते हैं।
















