ग्रामीण विकास के बिना ‘विकसित भारत’ की कल्पना अधूरी : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गांवों को भारत की प्रगति का मूल आधार बताया है। नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ के समापन पर उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का संपूर्ण विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक हमारे गांव समृद्ध और आत्मनिर्भर नहीं बनते।
इस सम्मेलन में देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों (जिनमें उत्तर प्रदेश के केशव प्रसाद मौर्य और छत्तीसगढ़ के विजय शर्मा शामिल थे) और वरिष्ठ नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया। राजनीतिक मतभेदों से परे हटकर हुआ यह मंथन सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की एक अनूठी मिसाल बनकर उभरा।
मुख्य घोषणाएँ और रणनीतियाँ
‘विकसित भारत- जी राम जी’ योजना की शुरुआत: आगामी 1 जुलाई से देश भर में मनरेगा के स्थान पर ‘विकसित भारत- जी राम जी’ योजना लागू होने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार द्वारा ₹95,682 करोड़ की अंतरिम राशि स्वीकृत की जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं जल्द पूरी करने को कहा है ताकि इसे सुचारू रूप से लागू किया जा सके।
लखपति दीदी का नया लक्ष्य: महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए ‘लखपति दीदी डैशबोर्ड’ और स्वयं सहायता समूहों के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत अब 6 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है (पहले यह लक्ष्य 3 करोड़ था)। इसके लिए अगले 5 वर्षों में ₹10 लाख करोड़ का बैंक लिंकिंग रोडमैप तैयार किया गया है।
राज्यों के सफल मॉडलों का प्रसार: सम्मेलन में झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में चल रहे बेहतरीन सामुदायिक और आजीविका मॉडलों की सराहना की गई। केंद्र सरकार इन बेस्ट प्रैक्टिसेज को अन्य राज्यों के साथ भी साझा करेगी ताकि देश भर में इनका लाभ मिल सके।
बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्यों को सुझाव
केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीण योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए राज्यों के सामने कुछ जरूरी बिंदु रखे:
प्रशासनिक स्थिरता: योजनाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का तबादला बार-बार न किया जाए और उन्हें कम से कम 2 से 3 साल का कार्यकाल दिया जाए।
रिक्त पदों को भरना: ग्रामीण विकास से जुड़े खाली पदों पर जल्द से जल्द नियुक्तियां की जाएं।
तकनीक का उपयोग: योजनाओं की निगरानी के लिए सोशल ऑडिट के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत किया जाए।
वित्तीय अनुशासन: राज्य सरकारें अपनी ओर से दी जाने वाली वित्तीय हिस्सेदारी को समय पर जारी करें।
कम बारिश की चेतावनी और भावी तैयारी
मौसम के रुख को देखते हुए केंद्रीय मंत्री ने 14 राज्यों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने जल संरक्षण के ढांचों को मजबूत करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार के अवसर तैयार रखने के निर्देश दिए हैं ताकि कम बारिश की स्थिति में भी ग्रामीणों को कोई समस्या न हो।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण सड़क योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने भूमिहीन परिवारों को जमीन मुहैया कराने और अटके हुए आवासों के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।
सहभागिता का मॉडल: शिवराज सिंह चौहान ने अंत में कहा कि यह समय आपसी होड़ का नहीं बल्कि मिलकर काम करने का है। केंद्र नीतियां बनाएगा, राज्य उन्हें जमीन पर लागू करेंगे, पंचायतें नेतृत्व संभालेंगी और जनता इसमें अपनी भागीदारी निभाएगी। इसी साझा प्रयास से ग्रामीण भारत की तकदीर बदलेगी।
















