पीएम मोदी ने शहीद भगत सिंह की जयंती पर किया नमन

नई दिल्ली (एजेंसी)। महान स्वतंत्रता सेनानी सरदार भगत सिंह की जयंती के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। प्रधानमंत्री ने देश की आजादी के लिए भगत सिंह के अद्वितीय योगदान, शौर्य और देशभक्ति के जज्बे को याद करते हुए उन्हें भारतीय युवाओं का असली मार्गदर्शक करार दिया।
सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपने संदेश और एक विशेष वीडियो पोस्ट के जरिए पीएम मोदी ने कहा कि भगत सिंह का त्याग और निर्भीकता हर देशवासी के हृदय में राष्ट्रप्रेम की अलख जगाती है। उन्होंने भगत सिंह के उस पत्र का विशेष उल्लेख किया, जो उन्होंने फांसी से पहले ब्रिटिश हुकूमत को लिखा था। उस पत्र में भगत सिंह ने खुद को और अपने साथियों को ‘युद्धबंदी’ मानते हुए फांसी के बजाय गोली से उड़ाने की मांग की थी, जो उनके अटूट साहस और निडरता की मिसाल है। प्रधानमंत्री ने उनके संवेदनशील स्वभाव और समाज के प्रति सेवाभाव को भी नमन किया।
क्रांति के प्रतीक सरदार भगत सिंह
28 सितंबर 1907 को अविभाजित पंजाब में जन्मे भगत सिंह ने बहुत छोटी उम्र में ही देश सेवा का मार्ग चुन लिया था।
असहयोग आंदोलन से शुरुआत: 12 वर्ष की आयु में जलियांवाला बाग के भीषण नरसंहार ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था। वर्ष 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और पूर्ण रूप से स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए।
सांडर्स वध और असेंबली बम कांड: लाला लाजपत राय की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए भगत सिंह और उनके साथियों ने अंग्रेज पुलिस अधिकारी सांडर्स को मौत के घाट उतारा। इसके बाद 8 अप्रैल 1929 को बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर उन्होंने सेंट्रल असेंबली में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के गगनभेदी नारों के साथ बम फेंका, जिसका मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि सोई हुई ब्रिटिश सरकार को जगाना था।
अंग्रेजी शासन ने उनके बढ़ते जनाधार और क्रांतिकारी विचारों से डरकर मुकदमा चलाया और निर्धारित समय से एक दिन पहले, 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया। आज भी सरदार भगत सिंह का जीवन देश की युवा पीढ़ी को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता है।
















