2006 छत्तीसगढ़ एसआई भर्ती : वरिष्ठता विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, याचिका खारिज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में साल 2006 की सूबेदार, प्लाटून कमांडर और सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा की सीनियरिटी (वरिष्ठता) को लेकर चल रहा लंबा कानूनी विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने एलसी कोसले और अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गई विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्रीचंद्रशेखर की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 23 जुलाई 2026 के निर्णय को सही ठहराया, जिसमें याचिकाकर्ताओं की याचिका को निरस्त कर दिया गया था।
विवाद का पूरा घटनाक्रम
विज्ञापन और पहली मेरिट लिस्ट (2006-2008): पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने सितंबर 2006 में सूबेदार, प्लाटून कमांडर और एसआई के 380 पदों पर भर्ती निकाली थी। अप्रैल 2008 में पहली मेरिट सूची जारी की गई, जिसके तहत एलसी कोसले, रवि सिंह ठाकुर, विनोद तोंडे और सैयद अहसान अली समेत कई उम्मीदवार चयनित हुए और उन्होंने ट्रेनिंग पूरी कर ली।
उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन (2009): मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र-2 के मॉडल उत्तरों में गड़बड़ी पाई गई। आठ गलत प्रश्नों को हटाकर कॉपियों का दोबारा मूल्यांकन किया गया, जिसके बाद जून 2009 में संशोधित मेरिट सूची आई। इसके चलते पहले से कार्यरत अभ्यर्थियों की पुरानी नियुक्ति निरस्त हो गई।
सुप्रीम कोर्ट का 2013 का निर्देश: वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को वैध माना, लेकिन अभ्यर्थियों की 3 साल की निर्विवाद सेवा को देखते हुए उन्हें नई नियुक्ति के आधार पर सेवा में बनाए रखने की छूट दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इनकी सीनियरिटी संशोधित सूची के अनुसार सबसे नीचे तय होगी और इन्हें पुराना बकाया वेतन नहीं मिलेगा।
हालिया सीनियरिटी विवाद और पदोन्नति का मामला: अभ्यर्थियों का तर्क था कि 2013 के आदेश के बाद उन्हें एकदम नया कर्मचारी मान लिया गया, जिससे 2008 से 2013 के दौरान भर्ती हुए अन्य प्लाटून कमांडर उनसे वरिष्ठ हो गए और प्रमोट होकर कंपनी कमांडर बन गए।
अदालत का अंतिम रुख: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (सिंगल और डिवीजन बेंच) ने पाया कि गृह विभाग ने 2013 के सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का ही पालन किया है। अब शीर्ष अदालत द्वारा 30 सितंबर को एसएलपी खारिज किए जाने के बाद विभाग की सीनियरिटी लिस्ट पर मुहर लग गई है।
















