छत्तीसगढ़ में 127 दुर्लभ पौधों की प्रजातियों को बचाने की पहल, जैव विविधता बोर्ड ने बनाई कार्ययोजना

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली विलुप्तप्राय और दुर्लभ वनस्पती प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान शुरू किया गया है। राज्य जैव विविधता बोर्ड ने राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (SFRTI) में दो दिनों की राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें 127 संकटग्रस्त पौध प्रजातियों की पहचान कर उनकी संरक्षण योजना तैयार की गई। यह पूरा आयोजन वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशन में संपन्न हुआ।
वैज्ञानिक मूल्यांकन और स्थानीय ज्ञान का संगम
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की तय कार्यप्रणाली के तहत वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इन पौधों की स्थिति का बारीकी से विश्लेषण किया। इस कार्यशाला की खास बात यह रही कि इसमें केवल वैज्ञानिक आंकड़ों पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि स्थानीय वैद्यों, शोधकर्ताओं, गैर-सरकारी संगठनों और विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के पारंपरिक ज्ञान की मदद भी ली गई।
पूर्व में तैयार की गई 3,035 पौधों की सूची में से गहन अध्ययन के बाद इन 127 अति-संवेदनशील प्रजातियों को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
दुर्लभ (Rare)
संकटग्रस्त (Threatened)
खतरे में (Endangered)
अधिसूचना और भावी कदम
जैव विविधता बोर्ड जल्द ही इन 127 चिन्हित पौधों की सूची को आधिकारिक रूप से अधिसूचित करेगा, जिससे इनके संवर्धन और रक्षा के लिए कानूनी व व्यावहारिक कदम उठाए जा सकें।
वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडे ने इस अवसर पर कहा कि राज्य के प्राकृतिक खजाने को बचाने के लिए वैज्ञानिकों, वन विभाग और स्थानीय समुदाय का एक साथ मिलकर काम करना अनिवार्य है। वहीं, बोर्ड के सदस्य सचिव अमिताभ बाजपेयी और SFRTI के निदेशक कौशलेन्द्र कुमार ने इस कार्य योजना की आगे की रूपरेखा साझा की।
















