महानदी जल बँटवारे पर दिल्ली में मंथन : अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ व ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की अहम बैठक

रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच वर्षों से चले आ रहे महानदी जल बँटवारे के मुद्दे को सुलझाने के लिए देश की राजधानी दिल्ली में एक महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय बैठक आयोजित की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में होने वाली इस उच्चस्तरीय चर्चा में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी आमने-सामने बैठकर संवाद करेंगे।
समझौते की ओर बढ़ते कदम
दिल्ली रवाना होने से पूर्व मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बताया कि दोनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, जिससे सकारात्मक समाधान की उम्मीद बढ़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों ही सरकारों ने केंद्रीय जल आयोग (CWC) को लिखित सहमति दी है कि जनहित में लिया गया कोई भी निष्पक्ष निर्णय उन्हें मान्य होगा।
क्या है महानदी विवाद का मुख्य कारण?
महानदी दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था, कृषि और पर्यावरण के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। विवाद की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
प्रवाह प्रभावित होने का आरोप: ओडिशा सरकार का कहना है कि छत्तीसगढ़ द्वारा महानदी के ऊपरी प्रवाह क्षेत्र में बैराजों के निर्माण से निचले इलाकों में पानी की आवक घटी है, विशेषकर कम बारिश वाले वर्षों में।
कानूनी प्रक्रिया और ट्रिब्यूनल: ओडिशा द्वारा दर्ज शिकायतों और सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका के बाद, केंद्र सरकार ने मार्च 2018 में ‘महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण’ (Mahanadi Water Disputes Tribunal) का गठन किया था।
महानदी का भौगोलिक व आर्थिक महत्व
उद्गम व मार्ग: महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित सिहावा पहाड़ी से होता है। यहाँ से यह पूर्व दिशा की ओर प्रवाहित होती हुई ओडिशा में प्रवेश करती है और अंततः बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है।
विकास का आधार: इस नदी पर ओडिशा में स्थित ऐतिहासिक हीराकुड बाँध निर्मित है। नदी का जल दोनों प्रदेशों में सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति का मुख्य स्रोत है।
















