मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे समेत 4 मांगों पर विपक्ष का ओडिशा बंद, बस-ट्रेन सेवाएं ठप, जनजीवन अस्त-व्यस्त

भुवनेश्वर (एजेंसी)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और तीन अन्य प्रमुख मुद्दों को लेकर गुरुवार को कांग्रेस नीत ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा बुलाए गए 12 घंटे के ओडिशा बंद का व्यापक असर देखने को मिला। राज्य भर में परिवहन और व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह थम गईं, जिससे सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, एमएमडीआर संशोधन कानून 2026 की वापसी, स्कूली किताबों में त्रुटियों के चलते शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे और बाढ़ पीड़ितों के लिए तुरंत मुआवजे की मांग को लेकर यह प्रदर्शन आयोजित किया गया था।
सड़कों पर टायर जलाकर चक्का जाम, ट्रेनें भी रोकी गईं
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस, वामपंथी दलों और गठबंधन के अन्य घटक घटकों के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर टायर जलाकर यातायात बाधित किया। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कई शहरों में बाइक रैलियां निकालीं।
बंद के चलते पैसेंजर बसें, ट्रक और ऑटो-रिक्शा सड़कों से गायब रहे, जिससे लंबी दूरी के यात्री हाईवे पर घंटों फंसे रहे। रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनें रोकने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं और सुरक्षाबलों के बीच कुछ स्थानों पर तीखी बहस व झड़प की खबरें भी आईं।
आपात सेवाओं को छूट, ग्रामीण इलाकों में दिखा ज्यादा असर
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने बताया कि बंद को जनता का पूरा समर्थन मिला है और इसका प्रभाव शहरों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक देखा गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यटकों, बाहर से आने वाले यात्रियों और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को बंद से छूट दी गई थी। भक्त चरण दास ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी चारों मांगें पूरी नहीं कीं, तो आने वाले दो महीनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
















