पीएम मोदी के आगामी ब्रुसेल्स दौरे के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर लगेगी मुहर

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी दिसंबर महीने में बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स की यात्रा करेंगे। इस दौरान भारत और 27 यूरोपीय देशों के संगठन (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (Free Trade Agreement) पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस बात की पुष्टि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने की है।
कनाडा में आयोजित ‘मॉन्ट्रियल काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस’ के एक कार्यक्रम के दौरान एंटोनियो कोस्टा ने बताया कि पीएम मोदी 17 दिसंबर को होने वाली यूरोपीय नेताओं की उच्चस्तरीय बैठक से ठीक पहले ब्रुसेल्स पहुंच सकते हैं। गौरतलब है कि दोनों पक्षों ने इस साल की शुरुआत में ही समझौते से जुड़ी सभी बातचीत पूरी कर ली थी। अब औपचारिक हस्ताक्षर के साथ यह ऐतिहासिक समझौता लागू होने की दिशा में कदम बढ़ा देगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर
यह समझौता दुनिया की लगभग 25% अर्थव्यवस्था और 2 अरब से अधिक की आबादी वाले विशाल बाजार को एक मंच पर लाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं (ट्रेड बैरियर्स) को हटाना और दोनों क्षेत्रों के बीच बिजनेस सुलभता को बढ़ाना है।
किसे मिलेगा क्या फायदा?
भारतीय उद्योग: भारत के 99% से अधिक निर्यात को यूरोपीय बाजारों में ‘ड्यूटी-फ्री’ (शुल्क-मुक्त) प्रवेश मिलेगा। इससे देश के टेक्सटाइल, लेदर, ज्वैलरी और जेम्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों को भारी बढ़त मिलेगी।
यूरोपीय संघ: बदले में, यूरोपीय संघ से भारत आने वाले अधिकांश सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) में बड़ी कटौती या राहत दी जाएगी।
संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर टैरिफ कटौती चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। वहीं, भारत ने अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र के हितों की रक्षा करते हुए इन्हें इस समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा है।
सर्विस सेक्टर को बढ़ावा: यह समझौता सिर्फ वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आईटी (IT), पेशेवर सेवाओं, बिजनेस कंसल्टिंग और रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) जैसे सर्विस सेक्टर पर भी लागू होगा।
लगातार मजबूत होते व्यापारिक रिश्ते
भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.54 अरब डॉलर (लगभग 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक) के स्तर को पार कर चुका है। इस नए समझौते से आने वाले समय में व्यापार के इन आंकड़ों में और भी बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
















