मध्य पूर्व में फिर तनाव : राष्ट्रपति ट्रंप का बयान, ‘सहमति न बनने पर ईरान पर हो सकती है सीमित सैन्य कार्रवाई’

वाशिंगटन (एजेंसी)। मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी अस्थिरता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संदर्भ में एक नया और कड़ा रुख अपनाया है। फ्लोरिडा के फोर्ट मायर्स में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तेहरान वाशिंगटन के साथ द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करने से पीछे हटता है, तो अमेरिका ईरान के विरुद्ध एक सीमित सैन्य अभियान चलाने पर विचार कर सकता है।
गौरतलब है कि अमेरिका और उसके सहयोगी राष्ट्रों द्वारा ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचों व परमाणु स्थलों को निशाना बनाकर चलाए गए व्यापक अभियानों को आधिकारिक तौर पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया है।
‘समझौता करें या परिणाम भुगतें’
रैली के दौरान ट्रंप ने अपनी विदेश नीति के आक्रामक इरादे स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरान के पास समझौते की दिशा में आगे बढ़ने या फिर एक और सैन्य कार्रवाई का सामना करने का विकल्प है। उन्होंने टिप्पणी की कि कूटनीतिक समाधान दोनों पक्षों के हित में होगा, हालांकि उन्होंने ईरानी नेतृत्व की ओर से सकारात्मक कदम उठाए जाने पर संदेह भी जताया।
अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी पर ट्रंप का रुख
ट्रंप का यह बयान तुर्की में तैनात अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक के उस साक्षात्कार के बाद आया है, जिसमें बैरक ने ईरान पर जल्द ही संभावित हमलों का संकेत दिया था। बैरक ने स्पष्ट किया था कि यदि खाड़ी देशों और वैश्विक सहयोगियों को लगातार धमकियां दी जाती रहीं, तो अमेरिका को सख्त कदम उठाने पड़ेंगे, यद्यपि इस कार्रवाई का उद्देश्य वहां शासन परिवर्तन (Regime Change) करना नहीं होगा।
जब पत्रकारों ने राजदूत बैरक की संभावित सैन्य कार्रवाई संबंधी टिप्पणी पर ट्रंप से सवाल किया, तो राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें तत्काल किसी ऐसे कदम की जानकारी नहीं है और उन्होंने बैरक के इस विशेष बयान से दूरी बनाए रखी।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
ईरान और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक बाजारों के साथ-साथ अमेरिकी राजनीति पर भी दिखने लगा है। पहले जहाँ 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पूर्व नई सैन्य कार्रवाई न करने की बात कही जा रही थी, वहीं अब इस मुद्दे को राजनीतिक मंचों पर जोर-शोर से उठाया जा रहा है।
पिछले कई महीनों से जारी इस गतिरोध और नौसैनिक घेराबंदी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल व ईंधन के दामों में उछाल आया है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका में बढ़ती महंगाई चुनावों में एक प्रमुख आर्थिक मुद्दा बन चुकी है। फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते बंद नजर आ रहे हैं, जिससे क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका और गहरा गई है।
















