वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अनूठी प्रदर्शनी को मिला पहला स्थान, बस्तर के बदलाव और विकास ने मोहा मन

रायपुर। छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस पर नवा रायपुर में आयोजित ‘राज्योत्सव 2026’ के दौरान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया है। समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह सम्मान प्रदान किया, जिसे विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडेय ने ग्रहण किया। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस शानदार सफलता पर विभागीय अमले और वन धन केंद्रों से जुड़े सभी सदस्यों को बधाई दी है।
‘बदलता बस्तर – संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर आधारित विशेष प्रस्तुति
इस वर्ष प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण ‘बदलता बस्तर – संवरता छत्तीसगढ़’ विषय था, जिसके जरिए बस्तर क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलाव, वन्यजीव संरक्षण और रोजगार के नए आयामों को बेहद सुंदरता से दर्शाया गया। प्रदर्शनी को दो मुख्य खंडों में बांटा गया था। प्रवेश द्वार पर जनजातीय गौरव वाटिका, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के चेंदरू गेट और दंतेवाड़ा के वन मंदिर की प्रतिकृतियां लगाई गई थीं, जो स्थानीय संस्कृति और प्रकृति के प्रति आदिवासियों के प्रेम को दर्शाती थीं।
बस्तर में शांति, पर्यटन और आजीविका की नई इबारत
प्रदर्शनी के ‘बदलता बस्तर’ हिस्से में सुकमा के तुंगल डैम पर पूर्व नक्सली महिलाओं द्वारा संचालित ‘तुंगल कैफे’ और स्थानीय युवाओं द्वारा नौकायन व कयाकिंग के जरिए आजीविका कमाने के प्रयासों को प्रमुखता से दिखाया गया। इसके अलावा, यूएन टूरिज्म के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ के लिए चयनित धुड़मारास गांव के होमस्टे, कोंडागांव की पुष्पाल घाटी के इको-कॉटेज और तीरथगढ़ जलप्रपात के मॉडलों ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। साथ ही, 572 देवगुड़ियों का जीर्णोद्धार और मनरेगा के तहत लाखों मानव दिवस सृजित करने के आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए।
वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक तकनीक की अनूठी झलक
‘संवरता छत्तीसगढ़’ खंड में प्रदेश की जैव विविधता को त्रिआयामी मॉडलों के जरिए जीवंत किया गया। इसमें बिलासपुर के कोपरा जलाशय को रामसर स्थल का दर्जा मिलने, बारनवापारा में काले हिरणों के पुनर्व्यवस्थापन और औरापानी में गिद्ध संरक्षण के कार्यों को दर्शाया गया। मानव-हाथी द्वंद्व को रोकने के लिए शुरू की गई ‘गजरथ यात्रा’ और ‘गज संकेत’ ऐप (जो ग्रामीणों को हाथियों की आवाजाही की जानकारी देता है) की सराहना की गई। इसके साथ ही, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘किसान वृक्ष मित्र योजना’ के तहत करोड़ों पौधे लगाने के आंकड़े भी साझा किए गए।
डिजिटल तकनीक और वन उत्पादों की धूम
युवाओं को लुभाने के लिए प्रदर्शनी में क्यूआर कोड आधारित वन्यजीव क्विज़, इंटरैक्टिव गेम्स, 360-डिग्री वर्चुअल रियलिटी और सेल्फी पॉइंट्स बनाए गए थे। संयुक्त वन प्रबंधन के स्टॉल पर बांस से बनी सुंदर वस्तुएं और ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के तहत वन मधु, त्रिफला चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू जैसे उत्पादों की बिक्री ने आगंतुकों को आकर्षित किया। औषधीय पादप बोर्ड ने घरेलू स्तर पर सिंगी और शतावरी की खेती से ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने की संभावनाओं को भी बखूबी प्रदर्शित किया।
















