अमेरिका मिडटर्म इलेक्शन 2026 : पिया डंडिया की शानदार जीत, विवेक रामास्वामी शुरुआती रुझानों में पिछड़े

नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनावों के शुरुआती परिणाम सामने आने लगे हैं। इस बार के चुनावों में भारतीय मूल के कई उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी हुई है, जिन पर दुनियाभर की निगाहें टिकी हैं।
पिया डंडिया ने फ्लोरिडा में दर्ज की जीत
फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार और पूर्व स्कूल प्रिंसिपल पिया डंडिया ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल कर ली है। शुरुआती और लगभग अंतिम चरणों की मतगणना के अनुसार, उन्हें अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी केसी अस्कर के मुकाबले स्पष्ट बढ़त मिली, जिसके बाद उन्हें इस सीट पर विजेता घोषित किया गया। भारतीय मूल के नेताओं के लिए इसे एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
विवेक रामास्वामी की राह मुश्किल
दूसरी ओर, ओहियो के गवर्नर पद के लिए चुनावी मैदान में उतरे रिपब्लिकन उम्मीदवार और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक विवेक रामास्वामी को शुरुआती रुझानों में झटका लगता दिख रहा है। वह अपनी डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी एमी एक्टन से काफी पीछे चल रहे हैं। हालांकि अभी पूरी मतगणना बाकी है, लेकिन शुरुआती आंकड़े उनके लिए एक कड़े मुकाबले की ओर इशारा कर रहे हैं।
अन्य भारतीय अमेरिकी उम्मीदवारों का हाल
अमिश शाह: एरिजोना के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुनाव लड़ रहे अमिश शाह की सीट पर मुकाबला बेहद कांटे का माना जा रहा है, और अंतिम नतीजों का इंतजार है।
नित्या रमन: लॉस एंजिल्स के मेयर पद के लिए उनका मुकाबला मौजूदा मेयर कैरेन बास से कड़ा बना हुआ है, और वोटों की गिनती जारी है।
सरिता कोमारेड्डी: न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की मौजूदा अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स के खिलाफ उनकी टक्कर पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव क्यों हैं अहम?
राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक दो साल बाद होने वाले इन मिडटर्म चुनावों में संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की सभी 435 सीटों और सीनेट की एक तिहाई सीटों पर फैसले होने हैं। वर्तमान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के पास दोनों सदनों में मामूली बहुमत है। इतिहास गवाह है कि पिछले 20 मिडटर्म चुनावों में से 18 बार सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। यदि इस बार भी ऐसा होता है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए आगामी नीतियों और कानूनों को पारित कराना कठिन हो सकता है।
















