छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं के लिए ‘बिहान’ योजना बनी वरदान : ममता राजवाड़े ने गन्ने की खेती से बदली अपनी किस्मत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाई जा रही ‘बिहान’ योजना (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता मिल रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। सरगुजा जिले के कटकोना गांव की रहने वाली ममता राजवाड़े इसकी एक बेहतरीन मिसाल पेश कर रही हैं।
स्व-सहायता समूह के सहयोग से शुरू की खेती
पीपल महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष ममता राजवाड़े ने आर्थिक तंगी से उबरने के लिए समूह से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया। इस पूंजी का उपयोग उन्होंने गन्ने की खेती में किया। अपनी कड़ी मेहनत और बेहतर पैदावार के बदौलत उन्होंने न सिर्फ अच्छी कमाई की, बल्कि उस आमदनी से समूह का पूरा ऋण ब्याज समेत चुकता कर दिया।
गन्ने की खेती और गुड़ उत्पादन से बढ़ी कमाई
ऋण चुकाने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अपने काम का दायरा बढ़ा दिया। वर्तमान में वे पांच एकड़ जमीन पर गन्ने की खेती कर रही हैं। इसके साथ ही, गन्ने का मूल्य संवर्धन कर गुड़ बनाने का काम भी शुरू किया है। इस कारोबार से उन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये तक की शुद्ध आमदनी हो चुकी है। अच्छी बात यह है कि व्यापारियों को ढूंढने के लिए उन्हें कहीं नहीं जाना पड़ता, बल्कि व्यापारी खुद उनके खेत तक पहुंचकर गन्ना और गुड़ खरीद लेते हैं, जिससे परिवहन की समस्या भी खत्म हो गई है।
मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
अपनी सफलता का श्रेय ‘बिहान’ योजना और स्व-सहायता समूह को देते हुए ममता ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का धन्यवाद किया है। उनका मानना है कि सही समय पर मिले आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाएं भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं। यह योजना आज छत्तीसगढ़ की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
















