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बीएमसी चुनाव : मुंबई में महायुति का परचम, तीन दशक बाद थमेगा ठाकरे परिवार का राज

मुंबई (एजेंसी)। आर्थिक राजधानी मुंबई के स्थानीय निकाय चुनावों (BMC) में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ गठबंधन ने ऐतिहासिक सफलता दर्ज की है। ताजा परिणामों और रुझानों के अनुसार, भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की मनसे (MNS) के दावों को पीछे छोड़ दिया है।

शुक्रवार देर रात तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा 88 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, शिंदे गुट को 28, उद्धव गुट को 65, कांग्रेस को 24 और मनसे को 6 वार्डों में सफलता मिलती दिख रही है। यह पहली बार होगा जब देश के सबसे अमीर नगर निगम में भाजपा का मेयर चुना जाएगा।

महायुति की इस प्रचंड जीत के 5 मुख्य कारण

भाजपा की इस ऐतिहासिक बढ़त के पीछे राजनीतिक विश्लेषकों ने निम्नलिखित प्रमुख कारक माने हैं:

मोदी लहर और विकास का एजेंडा: पिछले एक दशक की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता जीत का आधार बनी। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि जनता ने पीएम मोदी के विकासवादी विजन पर मुहर लगाई है। विपक्ष के पास फिलहाल मोदी के नेतृत्व का कोई ठोस विकल्प नजर नहीं आ रहा है।

शिवसेना का विभाजन: 2022 में शिवसेना में हुई टूट उद्धव ठाकरे के लिए भारी पड़ी। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने न केवल 28 सीटें जीतीं, बल्कि उद्धव गुट के पारंपरिक मराठी वोटों में भी सेंध लगाई। इस बंटवारे का सीधा फायदा भाजपा को मिला।

उत्तर भारतीय वोट बैंक का ध्रुवीकरण: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे (MNS) के गठबंधन ने मराठी वोटर्स को साधने की कोशिश की, लेकिन राज ठाकरे की उत्तर भारतीय विरोधी छवि ने भाजपा की राह आसान कर दी। मुंबई का एक बड़ा उत्तर भारतीय तबका भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा रहा।

रणनीतिक प्रचार और फडणवीस का नेतृत्व: इस चुनाव को जीतने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी मशीनरी झोंक दी थी। देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं मोर्चा संभाला और जमीनी स्तर पर सघन प्रचार किया। भाजपा का संगठनात्मक ढांचा विपक्षी गठबंधन की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हुआ।

एंटी-इन्कंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर): बीएमसी पर लगभग 30 वर्षों से ठाकरे परिवार और अविभाजित शिवसेना का वर्चस्व रहा है। लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण उत्पन्न हुई नाराजगी और बदलाव की आकांक्षा ने भी भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया।

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