छत्तीसगढ़

रायपुर में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान : मुख्यमंत्री साय ने किया “आपातकाल के योद्धा” स्मारिका का विमोचन

रायपुर। राजधानी के डीडीयू ऑडिटोरियम में आपातकाल स्मृति दिवस के मौके पर एक गरिमापूर्ण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने शिरकत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने आपातकाल के दौरान संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया और उनके त्याग पर केंद्रित स्मारिका “आपातकाल के योद्धा” का विमोचन किया। इसके साथ ही उन्होंने इस विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के होनहार विजेताओं को भी पुरस्कृत किया।

राष्ट्र प्रथम की भावना और सांस्कृतिक मूल्य: इंद्रेश कुमार

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री इंद्रेश कुमार ने लोकतंत्र और राष्ट्रीय मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र सिर्फ एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने का संस्कार है। आपातकाल के दौर को देश के लोकतांत्रिक इतिहास की कठिन परीक्षा बताते हुए उन्होंने कहा कि तमाम अत्याचारों और जेल की यातनाओं के बाद भी सेनानियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों को डिगने नहीं दिया। उन्होंने युवाओं से देश की एकता, नशामुक्त समाज और स्वच्छता में योगदान देने की अपील करते हुए “राष्ट्र प्रथम” के संकल्प को सर्वोपरि रखने की बात कही।

स्वतंत्रता और लोकतंत्र की कीमत को समझे नई पीढ़ी: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि 1975 का आपातकाल देश के इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय है, जिसे विस्मृत नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ी को यह अहसास होना चाहिए कि आज हम जिस आजादी का आनंद ले रहे हैं, वह कितने बड़े संघर्षों के बाद मिली है। इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने के कदम की उन्होंने सराहना की।

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए अपने परिवार के संघर्षों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय श्री नरहरि साय ने 19 महीने जेल में बिताए थे। उस कठिन दौर में जब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट था, तब स्वयंसेवकों ने भेष बदलकर गुप्त रूप से उनके घरों तक राशन पहुँचाया था।

लोकतंत्र के सजग प्रहरी बनने की प्रेरणा: डॉ. रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि 1975 का वह दौर प्रेस की आजादी पर पाबंदी और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन का समय था। लेकिन उस दमन चक्र ने देश की जनता को अपने अधिकारों के प्रति और अधिक जागरूक बना दिया। यह दिन हमें सदैव लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए तत्पर रहने की सीख देता है।

निबंध प्रतियोगिता के विजेता हुए सम्मानित

कार्यक्रम में राज्य स्तर पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस प्रतियोगिता में राज्य के 540 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया था।

स्कूल स्तर पर (“आपातकाल कभी विस्मृत न हो”): रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान हासिल कर 31 हजार रुपये का नकद पुरस्कार और स्मृति चिन्ह जीता। कोरबा के सूरज तांडिया दूसरे और दुर्ग के अंश देशमुख तीसरे स्थान पर रहे।

कॉलेज स्तर पर (“25 जून : संविधान हत्या दिवस”): रायपुर की कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय और दुर्ग की खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं।

गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति

इस समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री श्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री कैलाश सोनी, विधायक गण, विभिन्न आयोगों व मंडलों के अध्यक्ष, संघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी तथा उनके परिवारजन उपस्थित रहे।

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