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वैश्विक स्तर पर अपनाया जाएगा भारत का निर्वाचन मॉडल : 40 से अधिक देश लागू करेंगे ‘SIR’ प्रक्रिया

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत की चुनाव प्रणाली और मतदाता सूची को शुद्ध करने की तकनीक अब विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ रही है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ‘लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह सहमति बनी है कि भारत द्वारा अपनाई जाने वाली विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को अब 40 से अधिक अन्य लोकतांत्रिक देश भी अपने यहाँ लागू करेंगे।

‘दिल्ली घोषणा 2026’ और चुनावी सुधार

सम्मेलन के समापन पर ‘दिल्ली घोषणा 2026’ को साझा करते हुए भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इस वैश्विक मंच पर शामिल सभी चुनाव प्रबंधन निकायों (EMBs) ने चुनावी शुद्धता के पांच मुख्य स्तंभों पर साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया है:

मतदाता सूची की सटीकता: डेटा को त्रुटिहीन बनाना।

चुनाव संचालन: मतदान की प्रक्रिया को सुगम बनाना।

तकनीकी नवाचार: चुनाव प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का उपयोग।

अनुसंधान एवं प्रकाशन: चुनावी डेटा और केस स्टडीज का आदान-प्रदान।

प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण: चुनावी अधिकारियों को कुशल बनाना।

शुद्ध मतदाता सूची: लोकतंत्र का आधार

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि एक पारदर्शी और जीवंत लोकतंत्र की नींव उसकी ‘शुद्ध मतदाता सूची’ होती है। उन्होंने कहा कि सभी देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो और प्रत्येक मतदाता के पास फोटो पहचान पत्र (Voter ID) उपलब्ध हो, ताकि धांधली की गुंजाइश खत्म हो सके।

सम्मेलन की मुख्य बातें

प्रतिभागी: इस आयोजन में 42 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों और 27 देशों के राजनयिक मिशन प्रमुखों सहित लगभग 1,000 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

SIR पर चर्चा: भारत मंडपम में आयोजित विभिन्न सत्रों में भारत के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) मॉडल की बारीकियों को दुनिया के सामने रखा गया।

भावी योजना: सभी सदस्य देश अपनी प्रगति की समीक्षा करने के लिए दिसंबर 2026 में पुनः नई दिल्ली में मुलाकात करेंगे।

इस अंतरराष्ट्रीय सहमति से यह स्पष्ट है कि चुनावी पारदर्शिता के मामले में भारत अब दुनिया का मार्गदर्शन कर रहा है।

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