छत्तीसगढ़

महानदी जल बंटवारा : अमित शाह की मौजूदगी में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की अहम बैठक

रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच दशकों पुराने महानदी जल विवाद को सुलझाने के लिए नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हिस्सा लिया और अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखा।

इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अध्यक्ष, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव तथा जल संसाधन मंत्रालयों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सहयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से निकलेगा हल: विष्णु देव साय

बैठक में छत्तीसगढ़ का रुख स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महानदी केवल पानी का जरिया नहीं है, बल्कि दोनों राज्यों की संस्कृति, कृषि और जीवन की मुख्य धारा है। उन्होंने कहा कि यह नदी दोनों राज्यों को अलग करने के बजाय आपस में जोड़ती है, इसलिए इसका समाधान टकराव के बजाय आपसी सहयोग और विश्वास से होना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया:

न्यायपूर्ण और पारदर्शी व्यवस्था: समाधान ऐसा होना चाहिए जो दोनों राज्यों के किसानों और आम नागरिकों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करे।

उद्गम राज्य की जरूरतें: महानदी का उद्गम और बड़ा कैचमेंट एरिया छत्तीसगढ़ में है। राज्य की सिंचाई, पेयजल और विशेषकर जनजातीय व ग्रामीण इलाकों की विकास आवश्यकताओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

हीराकुंड का सम्मान: छत्तीसगढ़, ओडिशा के लिए हीराकुंड बांध के महत्व को समझता है और इसके बेहतर संचालन में पूरा सहयोग देने को तैयार है।

वैज्ञानिक आंकलन पर भरोसा: दोनों राज्यों के बीच पानी की उपलब्धता और मांग से जुड़े आंकड़े पारदर्शी तरीके से साझा होने चाहिए। तकनीकी आंकलन के लिए केंद्रीय जल आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण है।

सहकारी संघवाद और बस्तर का उदाहरण

गृह मंत्री अमित शाह की इस पहल की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार की मध्यस्थता से सकारात्मक हल निकलने की उम्मीद बढ़ी है। उन्होंने सरदार पटेल के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि संवाद के जरिए लंबित मुद्दों को सुलझाना ही सच्चे ‘सहकारी संघवाद’ की पहचान है।

उन्होंने बस्तर का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्या पर काबू पाया गया, उसी इच्छाशक्ति और संवाद के जरिए महानदी विवाद का भी स्थाई समाधान खोजा जा सकता है।

विवाद नहीं, साझा विरासत का प्रतीक

ओडिशा और छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ की परंपरा और शिवरीनारायण से पुरी तक का सांस्कृतिक जुड़ाव दोनों राज्यों को एक सूत्र में बांधता है। इसलिए महानदी को विवाद का मुद्दा बनाने के बजाय साझी समृद्धि का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

क्या है विवाद की पृष्ठभूमि?

वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद के समाधान के लिए ‘महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण’ (Tribunal) का गठन किया गया था। ट्रिब्यूनल की कार्यवाही के साथ-साथ अब दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और तकनीकी स्तर पर सीधे संवाद के जरिए सर्वस्वीकार्य हल तलाशने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।

बैठक में छत्तीसगढ़ की ओर से मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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