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सऊदी अरब में मिसाइल अलर्ट सिस्टम बंद : रियाद पर हमलों के बाद बढ़ी चिंताएं, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली (एजेंसी)। सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर हाल ही में हुए सिलसिलेवार हमलों के बाद देश की सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले सप्ताह रियाद में हुए चार हमलों से ठीक पहले आम नागरिकों के मोबाइल फोन पर किसी भी तरह का सरकारी अलर्ट जारी नहीं किया गया था। इन हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है।

क्यों खामोश रही चेतावनी प्रणाली?

एक तरफ जहां हूती विद्रोहियों की ओर से लगातार बढ़ते हमलों का खतरा मंडरा रहा था, वहीं सऊदी अरब की राष्ट्रीय शुरुआती चेतावनी प्रणाली बंद नजर आई। इसके विपरीत, खाड़ी क्षेत्र के अन्य देश संभावित खतरों से निपटने के लिए तकनीक का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं।

कतर: आंतरिक मंत्रालय द्वारा मोबाइल फोन पर लगातार अलर्ट भेजे जा रहे हैं, जिसमें नागरिकों को घरों के भीतर रहने और खिड़कियों से दूर रहने की हिदायत दी जाती है।

बहरीन और कुवैत: इन देशों में सायरन बजाकर लोगों को समय रहते सुरक्षित ठिकानों पर जाने के लिए सतर्क किया जाता है।

सऊदी अरब ने इसी साल मई में मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए संभावित सैन्य हमलों की जानकारी देने के लिए इस सिस्टम की शुरुआत की थी। लेकिन हमलों में तेजी आने के बावजूद इस प्रणाली के सक्रिय न होने से नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।

बार-बार अलर्ट आने से नींद में खलल की शिकायत!

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक निजी संस्थान ने पश्चिमी देशों के अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि सऊदी अधिकारियों ने सुरक्षा अलर्ट बंद करने के पीछे एक अजीब वजह बताई है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ नागरिकों ने शिकायत की थी कि रात के समय बार-बार अलर्ट आने से उनकी नींद प्रभावित होती है और परेशानी होती है। हालांकि, सऊदी सरकार की तरफ से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

पूर्व अमेरिकी राजदूत माइकल रैटनी का मानना है कि सऊदी प्रशासन आम जनता को खतरे से आगाह करने और देश में सामान्य जनजीवन को प्रभावित होने से बचाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इस स्थिति ने लोगों की बेचैनी और बढ़ा दी है।

दूतावासों को भी नहीं मिली थी सबसे घातक हमले की जानकारी

सोमवार तक रियाद को करीब एक दर्जन बार निशाना बनाए जाने के बावजूद कोई सार्वजनिक चेतावनी जारी नहीं की गई थी। हालांकि, पश्चिमी देशों के दूतावास अपनी खुफिया एजेंसियों और सऊदी अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर अपने कर्मचारियों को आंतरिक अलर्ट भेज रहे थे। इसके बावजूद, शनिवार को रियाद एयरपोर्ट पर हुए सबसे घातक हमले से पहले दूतावासों तक को कोई चेतावनी नहीं मिल पाई थी।

सुरक्षा चुनौतियों के बीच ऊर्जा सम्मेलन का आयोजन

इन तमाम सुरक्षा चिंताओं के बीच सऊदी अरब ने सोमवार को रियाद में विश्व पेट्रोलियम काउंसिल एनर्जी कांग्रेस की मेजबानी की। ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने जोखिमों को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि देश अपनी आर्थिक योजनाओं को रुकने नहीं देगा। उन्होंने कहा, “आप जानते हैं कि यह देश सुरक्षित है, और हमारा यह जमावड़ा यह साबित करता है कि हम अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेंगे।”

फिलहाल, सऊदी अरब के सामने एक ओर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर नागरिकों को समय पर सटीक जानकारी मुहैया कराने के लिए अपनी चेतावनी प्रणाली को फिर से दुरुस्त करने का दबाव भी बढ़ गया है।

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