नक्सलियों के ‘अर्बन नेटवर्क’ पर शिकंजा, 9 संदिग्धों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। बिलासपुर स्थित एनआईए (NIA) की विशेष अदालत में एसआईए ने नौ आरोपियों के विरुद्ध औपचारिक आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। इन सभी पर प्रतिबंधित नक्सली संगठनों को रसद, चिकित्सा सहायता, वाहन और गोपनीय सूचनाएं साझा करने का गंभीर आरोप है। अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई 20 मार्च को करेगी।
छद्म वेश में चल रहा था नेटवर्क
लोक अभियोजक दाऊराम चंद्रवंशी के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा सितंबर 2025 में हुआ था। रायपुर पुलिस मुख्यालय को सूचना मिली थी कि राज्य के विभिन्न शहरों में कुछ संदिग्ध व्यक्ति ‘मजदूर’ बनकर रह रहे हैं। जांच में यह बात सामने आई कि ये लोग आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर जंगलों में सक्रिय नक्सलियों तक महत्वपूर्ण डेटा और सुरक्षा बलों की जानकारी पहुंचा रहे थे। ये आरोपी न केवल नक्सलियों की विचारधारा का प्रचार कर रहे थे, बल्कि उन्हें शहरी क्षेत्रों से संसाधन भी मुहैया करा रहे थे।
प्रमुख गिरफ्तारियां और बरामदगी
एसआईए की जांच के दौरान सबसे पहले रायपुर से बीजापुर के रहने वाले जग्गू कुर्साम (डिविजनल कमेटी मेंबर) और उनकी पत्नी कमला कुर्साम को हिरासत में लिया गया। इनकी निशानदेही पर अन्य सात सहयोगियों को कोरबा, बिलासपुर, नारायणपुर और बीजापुर जैसे इलाकों से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में शामिल हैं:
राम इन्चाम (कोरबा से)
पवन उर्फ आकाश (बिलासपुर से)
धनसिंह गावड़े (नारायणपुर से)
संदैव पोडयामी, गिरधर नाग, सुकारू राम और शंकर कोरसा (सभी बीजापुर से)
बरामद सामग्री और कानूनी कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान इन आरोपियों के पास से भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री जब्त की गई है, जिसमें शामिल हैं:
सोना और सोने के बिस्कुट।
बड़ी मात्रा में नकदी।
लैपटॉप, मोबाइल और कई पेन ड्राइव जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स।
इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मंगलवार को विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत में यह चालान पेश किया गया, जिस पर अब कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
















