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भारतीय वायुसेना की बढ़ेगी ताकत : 114 नए राफेल विमानों की खरीद की तैयारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय आकाश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। रक्षा बजट में हालिया बढ़ोतरी के बाद, अब भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों को शामिल करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली इस महा-डील को क्षेत्रीय सुरक्षा और पड़ोसी देशों से जुड़ी चुनौतियों के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है।

प्रमुख बिंदु और रणनीतिक महत्व

उच्च स्तरीय बैठक: रक्षा मंत्रालय अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाला है, जिसमें इस प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी। रक्षा खरीद बोर्ड पहले ही इसे शुरुआती हरी झंडी दे चुका है।

मैक्रों की यात्रा: फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 18 फरवरी को ‘एआई शिखर सम्मेलन’ के लिए दिल्ली आ रहे हैं। उनकी इस यात्रा से पहले इस सौदे पर चर्चा तेज हो गई है।

‘मेक इन इंडिया’ पर जोर: इस सौदे की सबसे खास बात यह है कि कुल 114 विमानों में से लगभग 80 प्रतिशत का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसमें डसॉल्ट और भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियां मिलकर काम करेंगी।

विमानों का स्वरूप: योजना के अनुसार, इसमें 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान शामिल होंगे।

वायुसेना की जरूरत और वर्तमान क्षमता

वर्तमान में भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमानों की कमी का सामना कर रही है। वायुसेना के पास अभी लगभग 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि पाकिस्तान और चीन जैसी दोहरी चुनौतियों से निपटने के लिए स्वीकृत संख्या 42 है।

श्रेणी,संख्या (अनुमानित)

प्रस्तावित नए राफेल,114
वर्तमान राफेल बेड़ा,36
नौसेना के लिए प्रस्तावित राफेल-M,26
कुल संभावित बेड़ा,176 राफेल विमान

रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी

सरकार ने इस साल रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15% अधिक है। यह कुल केंद्रीय बजट का लगभग 14.68 प्रतिशत है। नीचे दिए गए आंकड़े पिछले कुछ वर्षों में रक्षा बजट में हुई निरंतर वृद्धि को दर्शाते हैं:

2024-25: 6.2 लाख करोड़ रुपये

2025-26: 6.81 लाख करोड़ रुपये

2026-27: 7.85 लाख करोड़ रुपये (वर्तमान)

यह निवेश न केवल सेना के आधुनिकीकरण में मदद करेगा, बल्कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा देगा। इस सौदे के पूरा होने के बाद भारत के पास 4.5-जेनरेशन वाले अत्याधुनिक विमानों का एक विशाल और शक्तिशाली बेड़ा होगा।

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