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परमाणु वार्ता पर ईरान का बड़ा दावा : अमेरिका ने संवाद से खींचे कदम, पश्चिम एशिया में गहराया संकट

नई दिल्ली (एजेंसी)। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक गतिरोध अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने वाशिंगटन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका परमाणु निरस्त्रीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने से कतरा रहा है। अरागची के अनुसार, जिनेवा में हुई हालिया मुलाकातों के दौरान ईरान ने परमाणु हथियारों का मुद्दा मेज पर रखा था, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधियों ने इस पर बात करने में कोई रुचि नहीं दिखाई।

जिनेवा वार्ता और बढ़ता तनाव

अरागची ने खुलासा किया कि 26 फरवरी को जिनेवा में हुई उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने परमाणु हथियारों के भविष्य को लेकर ठोस चर्चा की पेशकश की थी। हालांकि, स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दिया। ईरानी विदेश मंत्री का दावा है कि अमेरिका शांतिपूर्ण समाधान के बजाय सैन्य टकराव की राह चुन रहा है।

उल्लेखनीय है कि दोनों देशों की तकनीकी टीमों के बीच 2 मार्च को विएना में अगली बैठक होनी थी, लेकिन कूटनीतिक विफलता और युद्ध की शुरुआत ने इस संभावना को खत्म कर दिया।

क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत की सक्रियता

पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालातों के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर विस्तृत चर्चा की।

पीएम मोदी की मुख्य चिंताएं:

नागरिक सुरक्षा: निर्दोष लोगों की जान जाने और बुनियादी ढांचे की तबाही पर गहरी चिंता।

व्यापारिक मार्ग: भारतीय सामान और ईंधन के सुरक्षित परिवहन को सुनिश्चित करना।

कूटनीति पर जोर: संकट के समाधान के लिए युद्ध के बजाय संवाद और डिप्लोमेसी का आह्वान।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर इस बातचीत की पुष्टि करते हुए शांति और स्थिरता के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।

आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियां

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद किए जाने से वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया है। भारत के लिए यह मार्ग सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। हाल ही में भारतीय तेल टैंकर पर हुई गोलीबारी की घटना ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है।

भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि

खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय निवास करते हैं। अकेले ईरान में 10,000 और इजरायल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक मौजूद हैं। भारत सरकार इन सभी की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मान रही है। इसी क्रम में पीएम मोदी ने पिछले 10 दिनों में सऊदी अरब, यूएई, इजरायल और कतर समेत कई क्षेत्रीय देशों के नेताओं से संपर्क साधा है।

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