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भारत बनेगा ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स का नया हब : किफायती और स्वदेशी तकनीक पर टिकीं नजरें

नई दिल्ली (एजेंसी)। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के एक विशेष सत्र ‘मीट द फ्यूचर: द राइज ऑफ द ह्यूमनॉइड’ में भविष्य की तकनीक की एक झलक देखने को मिली। इस दौरान Bidyut इनोवेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल शाह ने भारत के रोबोटिक्स विजन को साझा किया। कार्यक्रम के दौरान मंच पर ‘G-1’ नामक दो रोबोट्स ने सबका ध्यान खींचा, जो हालांकि चीन में विकसित हैं, लेकिन उनकी पूरी प्रोग्रामिंग भारत में की गई है।

राहुल शाह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में इन रोबोट्स का प्रदर्शन बिक्री के लिए नहीं, बल्कि प्रेरणा के लिए है। उनका मानना है कि जब भारतीय शिक्षण संस्थानों में छात्र इस तरह की तकनीक को करीब से देखेंगे, तो उनमें खुद के नवाचार (Innovation) विकसित करने का उत्साह जगेगा।

‘मेड इन इंडिया’ रोबोट्स की तैयारी

राहुल शाह के अनुसार, भारत बहुत जल्द इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने वाला है:

लॉन्च टाइमलाइन: अगले 3 से 5 वर्षों के भीतर भारत में बने ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार में उपलब्ध होंगे।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारतीय रोबोट न केवल प्रदर्शन में, बल्कि गुणवत्ता में भी दुनिया के अग्रणी रोबोट्स को कड़ी चुनौती देंगे।

किफायती तकनीक: जिस तरह भारत ने ‘चंद्रयान’ मिशन को अन्य देशों की तुलना में बेहद कम लागत में पूरा कर दुनिया को हैरान किया था, वही फॉर्मूला रोबोटिक्स में भी अपनाया जाएगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या भारतीय रोबोट मौजूदा वैश्विक कीमतों के एक-चौथाई दाम पर मिलेंगे, तो शाह ने इस पर अपनी सहमति जताई।

तकनीक और मनोरंजन का संगम

सत्र के दौरान रोबोट्स की क्षमताओं का प्रदर्शन भी किया गया। एक रोबोट ने शानदार डांस पेश किया, जिसकी कोडिंग में टीम को 10 दिन का समय लगा। वहीं, दूसरे रोबोट ने कुंगफू के दांव-पेच दिखाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

बातचीत के दौरान जब एक रोबोट से इंसानों के प्रति उसकी पसंद पूछी गई, तो उसने अपनी प्रोग्रामिंग और ह्यूमर का परिचय देते हुए कहा, “मुझे ‘हाँ’ कहने के लिए प्रोग्राम किया गया है, लेकिन आपके WhatsApp फॉरवर्ड्स देखने के बाद आप लोगों को पसंद करना थोड़ा मुश्किल काम है।”

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