एमपी के युवा गढ़ेंगे विकसित भारत की नींव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूपीएससी सफल अभ्यर्थियों का किया सम्मान

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित एक विशेष सम्मान समारोह में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 की परीक्षा में सफल हुए राज्य के युवाओं से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की प्रतिभाओं की बढ़ती भागीदारी को राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया।
2047 के ‘स्वर्ण भारत’ के वास्तुकार हैं ये युवा
मुख्यमंत्री ने चयनित 61 अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि ये युवा केवल अधिकारी नहीं, बल्कि वर्ष 2047 के आत्मनिर्भर और विकसित भारत के शिल्पकार हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि जब देश अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब यही युवा प्रशासनिक सेवाओं के शीर्ष पर रहकर नीति-निर्धारण कर रहे होंगे। डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि इन अभ्यर्थियों का हर निर्णय प्रदेश के करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
‘मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं का परचम’ पुस्तिका का विमोचन
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के सफल अभ्यर्थियों के संघर्ष और उनकी उपलब्धि पर केंद्रित डिजिटल पुस्तिका “मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं का परचम” का लोकार्पण किया। इसके साथ ही एक लघु फिल्म के माध्यम से उनकी सफलता की यात्रा को प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से सभी अभ्यर्थियों को ट्रॉफी प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।
संवेदनशीलता और सेवा का मंत्र
शहीद दिवस का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हमें ‘स्वराज्य’ दिया, अब ‘सुराज’ (सुशासन) स्थापित करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने अभ्यर्थियों को सीख दी कि:
प्रशासनिक सफलता केवल रैंक से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, ईमानदारी और कड़ी मेहनत से मापी जाती है।
अंतिम पंक्ति के व्यक्ति (अंत्योदय) के कल्याण को प्राथमिकता दें।
शारीरिक बाधाएं कभी सपनों के आड़े नहीं आतीं, जिसका उदाहरण 173वीं रैंक प्राप्त दृष्टिबाधित अभ्यर्थी अक्षत बल्दवा हैं।
बदलता परिवेश: छोटे शहरों और सरकारी स्कूलों का दबदबा
उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अनुपम राजन ने जानकारी दी कि इस वर्ष देश के कुल 958 सफल अभ्यर्थियों में से 61 मध्य प्रदेश से हैं। खास बात यह है कि इनमें से 22 युवा सरकारी शिक्षण संस्थानों से पढ़े हैं। सोहागपुर और सिरोंज जैसे छोटे कस्बों से आए युवाओं का चयन यह सिद्ध करता है कि अब यूपीएससी की तैयारी के लिए बड़े महानगरों में जाना अनिवार्य नहीं रह गया है।
समारोह में अखिल भारतीय स्तर पर 5वीं रैंक प्राप्त ईशान भटनागर और 260वीं रैंक प्राप्त प्राची चौहान (एक किसान की बेटी) ने भी अपने अनुभव साझा किए, जो प्रदेश की अन्य बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणादायी रहे।
















