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यूपी में पाक जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ : सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को मोहरा बनाने की बड़ी साजिश

उत्तर प्रदेश (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह को बेनकाब किया है, जो सरहद पार से भारतीय युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों में धकेलने का प्रयास कर रहा था। गाजियाबाद पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शामली के समीर जैसे कई युवाओं को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) से जुड़े हैंडलर अपने जाल में फंसा रहे थे।

विदेशों से बुना जा रहा था साजिश का जाल

पुलिस जांच के अनुसार, यह नेटवर्क केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार दुबई, अमेरिका, नेपाल और बांग्लादेश से भी जुड़े हैं। इन देशों में बैठे एजेंट भारतीय युवाओं को निशाना बना रहे थे। विशेष रूप से पश्चिमी यूपी (मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद) के साथ-साथ हरियाणा और बिहार के लड़कों को इस गिरोह में शामिल करने की योजना थी।

गैंगस्टरों के नाम का लिया जा रहा था सहारा

जांच में एक बेहद शातिर पैंतरे का पता चला है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए इस नेटवर्क के व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप ‘लॉरेंस बिश्नोई’ जैसे गैंगस्टरों के नाम पर बनाए गए थे। इसका मकसद यह था कि पुलिस इसे सामान्य आपराधिक गिरोह समझे और जासूसी के बड़े खेल पर किसी की नजर न पड़े।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क?

डिजिटल मीटिंग्स: नेटवर्क की गतिविधियों की समीक्षा के लिए हर तीसरे दिन जूम (Zoom) मीटिंग की जाती थी, जिसमें विदेशों में बैठे आका शामिल होते थे।

टारगेट: युवाओं को धार्मिक स्थलों और भारतीय सेना से जुड़ी संवेदनशील जगहों की तस्वीरें और वीडियो भेजने के निर्देश दिए जाते थे।

पहचान की चोरी: एजेंट खुद को हिंदू दिखाने के लिए माथे पर टीका लगाकर वीडियो कॉल करते थे और ‘सरदार’ जैसे छद्म नामों का उपयोग करते थे ताकि युवाओं का भरोसा जीता जा सके।

ब्रेनवॉश: ग्रुप्स में कट्टरपंथी धार्मिक सामग्री और वीडियो साझा किए जाते थे ताकि युवाओं की विचारधारा को बदला जा सके।

आर्थिक लालच और पुलिस की निगरानी

पकड़े गए आरोपी समीर को शुरुआती तौर पर तीन किस्तों में मात्र 5,000 रुपये दिए गए थे। पुलिस अब उस वित्तीय स्रोत का पता लगा रही है जहाँ से यह पैसा भेजा गया था।

अहम जानकारी: वर्तमान में जांच एजेंसियां दुबई और नेपाल के 20 से अधिक संदिग्ध एजेंटों पर नजर रख रही हैं। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, लगभग 250 से ज्यादा संदिग्ध व्यक्ति पुलिस के रडार पर हैं।

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