पिंक कार्ड पर राजनीति : मुख्यमंत्री ने अफवाहों को नकारा, बताया इसे पारदर्शिता की ओर एक कदम

नई दिल्ली (एजेंसी)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘पिंक कार्ड’ योजना को लेकर चल रही चर्चाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने हाल ही में जारी भ्रामक सूचनाओं को एक “सोची-समझी राजनीतिक साजिश” करार देते हुए महिलाओं से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी अफवाह पर यकीन न करें।
अफवाहों का खंडन और स्पष्टीकरण
मुख्यमंत्री ने एक वीडियो संदेश के जरिए उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि बस बदलते समय पिंक कार्ड काम करना बंद कर देता है। उन्होंने स्पष्ट किया:
निर्बाध यात्रा: महिलाएं एक बस से उतरकर दूसरी बस में जितनी बार चाहें टैप करके यात्रा कर सकती हैं। कार्ड पूरी तरह सक्रिय और प्रभावी है।
भ्रष्टाचार पर लगाम: पहले बस यात्रा के भुगतान का कोई सटीक रिकॉर्ड न होने के कारण वित्तीय अनियमितताओं की गुंजाइश रहती थी। पिंक कार्ड तकनीक से अब हर यात्रा का डिजिटल हिसाब रखा जा रहा है।
पारदर्शिता: नया सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि सरकार द्वारा दिया जाने वाला पैसा सीधे और सही तरीके से इस्तेमाल हो, जिससे बिचौलियों और निजी स्वार्थों को मिलने वाला अनुचित लाभ खत्म हो गया है।
“पिंक कार्ड का उद्देश्य केवल मुफ्त यात्रा देना ही नहीं, बल्कि सरकारी खजाने के एक-एक पैसे का सही हिसाब रखना भी है। जो लोग सिस्टम में पारदर्शिता आने से परेशान हैं, वही इस तरह का दुष्प्रचार कर रहे हैं।” — रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री
कार्ड बनवाने की प्रक्रिया और सुविधा
मुख्यमंत्री ने दिल्ली की महिलाओं को आश्वस्त किया कि पिंक कार्ड बनवाने के लिए किसी भी तरह की जल्दबाजी या लंबी लाइनों में लगने की आवश्यकता नहीं है:
समय सीमा: कार्ड पंजीकरण की प्रक्रिया अगले तीन महीनों तक सुचारू रूप से जारी रहेगी।
असीमित लाभ: महिलाएं दिन में कितनी भी बार और किसी भी समय बिना किसी शुल्क के बस सेवा का लाभ उठा सकती हैं।
सुविधाजनक पंजीकरण: प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को सरल और सुलभ रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि उनकी सरकार दिल्ली की महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी राजनीतिक दबाव में जनहित की योजनाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
















