अंतरिक्ष विज्ञान में नया सवेरा : नासा का आर्टेमिस-2 मिशन, आधी सदी बाद चांद की ओर बढ़ेंगे कदम

नई दिल्ली (एजेंसी)। 1972 के अपोलो-17 मिशन के बाद, यानी करीब 54 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, मानवता एक बार फिर चंद्रमा की दहलीज पर दस्तक देने जा रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का आर्टेमिस-2 (Artemis-2) मिशन न केवल आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन है, बल्कि यह भविष्य के मंगल अभियानों के लिए एक ठोस आधारशिला भी है।
क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?
आर्टेमिस-2 नासा के महत्वाकांक्षी आर्टेमिस प्रोग्राम का दूसरा चरण है। जहाँ 2022 में आर्टेमिस-1 को बिना किसी यात्री के परीक्षण के तौर पर भेजा गया था, वहीं आर्टेमिस-2 एक मानव मिशन होगा। यह मिशन लगभग 10 दिनों का होगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री ‘फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी’ का उपयोग करेंगे। इसका मतलब है कि यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का लाभ उठाकर प्राकृतिक रूप से पृथ्वी की ओर वापस आएगा, जिससे अतिरिक्त ईंधन की बचत होगी।
इस ऐतिहासिक सफर के सारथी
इस मिशन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता है। पहली बार पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) के पार जाने वाले दल में एक महिला, एक अश्वेत व्यक्ति और एक कनाडाई नागरिक शामिल हैं:
रीड वाइसमैन (Reid Wiseman): कमांडर
विक्टर ग्लोवर (Victor Glover): पायलट
क्रिस्टीना कोच (Christina Koch): मिशन विशेषज्ञ
जेरेमी हेंसन (Jeremy Hansen): मिशन विशेषज्ञ
मिशन की कार्यप्रणाली और मुख्य पड़ाव
नासा ने इस प्रक्षेपण के लिए 1 अप्रैल, 2026 की संभावित तारीख तय की है (बैकअप विंडो के साथ)। मिशन के दौरान होने वाली मुख्य गतिविधियां इस प्रकार हैं:
प्रक्षेपण: केनेडी स्पेस सेंटर से SLS (Space Launch System) रॉकेट के जरिए ओरायन कैप्सूल को लॉन्च किया जाएगा।
कक्षा परीक्षण: चंद्रमा की ओर बढ़ने से पहले पृथ्वी की कक्षा में लाइफ सपोर्ट और संचार प्रणालियों की गहन जांच होगी।
लूनर फ्लाईबाय: यान चंद्रमा की सतह से हजारों किलोमीटर ऊपर से गुजरेगा। यात्री चंद्रमा के उस हिस्से (Far Side) को अपनी आंखों से देख सकेंगे जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता।
वैज्ञानिक अध्ययन: इस दौरान अंतरिक्ष यात्री सौर विकिरण, अंतरिक्ष के मौसम और चंद्रमा की भौगोलिक संरचनाओं का अध्ययन करेंगे।
वापसी: चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की मदद से यान पृथ्वी की ओर मुड़ेगा और प्रशांत महासागर में पैराशूट के जरिए सुरक्षित लैंडिंग करेगा।
सतह पर लैंडिंग क्यों नहीं?
अक्सर यह सवाल उठता है कि जब इंसान चांद तक जा रहे हैं, तो वे वहां उतरेंगे क्यों नहीं? इसका कारण यह है कि ओरायन (Orion) कैप्सूल केवल यात्रा और सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसमें लैंडिंग की क्षमता नहीं है। चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए SpaceX द्वारा एक विशेष ‘लूनर लैंडर’ विकसित किया जा रहा है, जिसका उपयोग अगले मिशन यानी आर्टेमिस-3 में किया जाएगा।
भविष्य का लक्ष्य: चांद से मंगल तक
आर्टेमिस-2 का प्राथमिक उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) में तकनीकी दक्षता को परखना है। नासा का दीर्घकालिक लक्ष्य चंद्रमा पर एक स्थायी बेस बनाना है, जो भविष्य में मंगल ग्रह (Mars) पर भेजे जाने वाले मानव मिशनों के लिए एक लॉन्चिंग पैड की तरह काम करेगा।
















