पीएम-जनमन योजना : महासमुंद के कमार समुदायों में विकास के नए युग का आगाज़

महासमुंद। महासमुंद जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाला विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) कमार समुदाय, जो कभी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा था, अब प्रगति की नई राह पर है। प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) के प्रभावी क्रियान्वयन से इन बस्तियों का कायाकल्प हो रहा है और दशकों से विकास की मुख्यधारा से कटे ये परिवार अब आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
विकास के आंकड़ों में बदलाव
वर्ष 2015-16 के सर्वेक्षण के मुताबिक, महासमुंद जिले के 76 गांवों में 923 कमार परिवार (लगभग 3,309 लोग) निवास करते हैं। इनमें सबसे अधिक परिवार महासमुंद ब्लॉक (41 गांव), बागबाहरा (33 गांव) और पिथौरा (2 गांव) में बसे हैं। पहले जंगलों और दिहाड़ी मजदूरी पर आश्रित ये परिवार मुख्य बस्तियों से दूर होने के कारण शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सेवाओं से वंचित थे।
बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण
जिला प्रशासन ने पीएम-जनमन योजना के जरिए दुर्गम इलाकों में संपर्क की बाधाओं को दूर किया है:
सड़क संपर्क: 26 ऐसी बस्तियां जो सड़क विहीन थीं, उन्हें पक्की सड़कों से जोड़कर शहरों तक पहुंच आसान बनाई गई है।
बिजली और पानी: नल-जल योजना से घर-घर पेयजल पहुँचाया गया है। साथ ही, विद्युतीकरण से न केवल अंधेरा दूर हुआ है, बल्कि बच्चों की शिक्षा में भी सुधार आया है।
आवास योजना: लगभग 678 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में स्थिरता और सम्मान आया है।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
प्रशासन ने केवल बुनियादी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया है:
बहुउद्देशीय केंद्र: इन केंद्रों के माध्यम से आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य जांच और रोजगार संबंधी गतिविधियां एक ही छत के नीचे संचालित हो रही हैं।
डोरस्टेप स्वास्थ्य सेवा: मोबाइल मेडिकल यूनिट्स अब सीधे बस्तियों तक पहुँचकर उपचार प्रदान कर रही हैं।
दस्तावेजीकरण: विशेष शिविरों के माध्यम से शत-प्रतिशत आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और बैंक खाते सुनिश्चित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, किसानों को ‘सम्मान निधि’ का लाभ भी पूर्ण रूप से मिल रहा है।
आज इन कमार बस्तियों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। वर्षों पुराने अभावों की जगह अब आत्मविश्वास और एक उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद ने ले ली है, जो इस महा-अभियान की सफलता का प्रमाण है।
















