बस्तर में नक्सलवाद का सूर्यास्त : बीजापुर में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी, करोड़ों का सोना और नकदी जब्त

बीजापुर/बस्तर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से एक ऐतिहासिक सफलता की खबर सामने आई है। सुरक्षाबलों ने ‘लाल आतंक’ के खिलाफ अपने अभियान के अंतिम चरण में बीजापुर के ताड़पला-कर्रेगुट्टा के जंगलों से देश का सबसे बड़ा ‘नक्सल डंप’ बरामद किया है। इस कार्रवाई ने न केवल नक्सलियों की आर्थिक कमर तोड़ दी है, बल्कि बस्तर संभाग को शांति की ओर अग्रसर कर दिया है।
खजाने और हथियारों का जखीरा बरामद
सुरक्षाबलों को मिली इस बड़ी कामयाबी में करोड़ों रुपये की संपत्ति और हथियारों का भंडार हाथ लगा है:
नगदी और सोना: बीजापुर और सुकमा के इलाकों से कुल 14 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई है। इसमें 2.90 करोड़ रुपये नकद और लगभग 11.60 करोड़ रुपये मूल्य का 7.2 किलोग्राम सोना शामिल है।
हथियारों की रिकवरी: अकेले बीजापुर से 93 हथियार बरामद किए गए हैं। पूरे अभियान के दौरान एके-47, एलएमजी (LMG), एसएलआर (SLR), इंसास (INSAS) और बीजीएल (BGL) जैसे कुल 198 अत्याधुनिक हथियार सुरक्षाबलों के कब्जे में आए हैं।
जिलेवार सरेंडर और बड़ी सफलताएं
31 मार्च की निर्धारित समय-सीमा के अंतिम दिन बस्तर के पांच प्रमुख जिलों में नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया:
जिला,मुख्य सफलताएं
बीजापुर,25 नक्सलियों ने 93 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। यहाँ से सबसे बड़ा वित्तीय डंप मिला।
सुकमा,16 लाख के दो इनामी नक्सलियों ने भारी मात्रा में कैश और ऑटोमैटिक हथियारों के साथ सरेंडर किया।
दंतेवाड़ा,9 लाख के इनामी 5 नक्सलियों का सरेंडर। सूचना के आधार पर 40 घातक हथियारों का जखीरा मिला।
नारायणपुर,विशाल डंप का भंडाफोड़। 59 हथियार और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद।
कांकेर,अंतिम क्षणों में एके-47 के साथ 2 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर शांति का मार्ग चुना।
एक नए युग की शुरुआत
इस अंतिम प्रहार के साथ ही दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और कांकेर जैसे जिलों में नक्सली अध्याय के अंत की घोषणा की जा रही है। सुरक्षाबलों की इस रणनीतिक जीत ने बस्तर संभाग को ‘नक्सल आतंक मुक्त क्षेत्र’ बनाने की दिशा में अंतिम मुहर लगा दी है।
“यह दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में लाल आतंक के अंत और शांति के नए सूर्योदय के रूप में याद किया जाएगा। भारी मात्रा में सोने और नकदी की बरामदगी यह दर्शाती है कि नक्सलवाद का आधार अब केवल लूट और उगाही तक ही सिमट गया था।”
अब ये क्षेत्र विकास और मुख्यधारा की राजनीति की ओर कदम बढ़ाने को तैयार हैं, जो दशकों से हिंसा की छाया में जी रहे थे।
















