स्लम एरिया के खातों से सट्टे का सिंडिकेट, 13 दबोचे गए

दुर्ग। दुर्ग में पुलिस ने ऑनलाइन आईपीएल सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। एंटी-क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने फर्जी खातों के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन किया था।
पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड कुणाल वर्मा सहित कुल 13 लोगों को हिरासत में लिया है। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गिरोह का मुख्य संचालक पहले सब्जी बेचने का काम करता था, लेकिन कम समय में अमीर बनने की चाह में उसने ‘सेट स्पोर्ट बुक’ और ‘लोटस ऐप’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टे का विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया।
केंद्रीय समन्वय पोर्टल से मिले संदिग्ध वित्तीय इनपुट के बाद पुलिस ने जाल बिछाया। सबसे पहले चरोदा इलाके से दो संदिग्धों, जावेद अख्तर और आभास जायसवाल, को हिरासत में लिया गया। इनसे हुई कड़ाई से पूछताछ के बाद इस पूरे रैकेट के तौर-तरीकों और बाकी सदस्यों का पता चला।
फर्जी बैंक खातों का नेटवर्क (म्युल अकाउंट्स)
इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर था:
टार्गेट ग्रुप: गिरोह मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर या स्लम बस्तियों में रहने वाले लोगों को निशाना बनाता था।
खरीद-फरोख्त: उन लोगों के नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इसके बाद पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और लिंक मोबाइल सिम को करीब 25,000 रुपये प्रति खाते के एवज में खरीद लिया जाता था।
लेन-देन: इन्हीं ‘म्युल’ खातों का उपयोग सट्टे की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था। शुरुआती जांच में अब तक लगभग 5 करोड़ रुपये के अवैध ट्रांजेक्शन की बात सामने आ चुकी है।
हैदराबाद से जुड़े हैं तार
गिरोह का जाल केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं था। पूछताछ में सामने आया है कि इस अवैध कारोबार को संचालित करने के लिए तेलंगाना के हैदराबाद (विशेषकर शमशाबाद और अल्फापुरम) में बकायदा ठिकाने बनाए गए थे, जहां से डिजिटल पैनल ऑपरेट किए जा रहे थे।
भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण बरामद
आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने मौके से सट्टेबाजी में इस्तेमाल होने वाला भारी लॉजिस्टिक सामान जब्त किया है:
जब्त की गई सामग्री कुल संख्या/मात्रा
कैश (नकद रकम) 2.57 लाख रुपये
लैपटॉप 09
मोबाइल फोन 46
बैंक पासबुक 23
एटीएम (ATM) कार्ड 146
सक्रिय सिम कार्ड 20
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से जब्त लैपटॉप और मोबाइलों के डेटा को खंगाला जा रहा है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य राज्यों के सफेदपोशों और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत को उजागर किया जा सके।
















