छत्तीसगढ़

बस्तर से नक्सलवाद का खात्मा और मजबूत संघीय ढांचा : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन के मुख्य अंश

रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्यों के विकास की निगरानी और आपसी समन्वय को बढ़ावा देना था।

नक्सलवाद पर ऐतिहासिक जीत और आगामी लक्ष्य

केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर में बैठक होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए घोषणा की कि आज पूरा बस्तर और देश नक्सलवाद के दंश से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। उन्होंने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय सुरक्षाबलों के साहस, सटीक खुफिया तंत्र (इनपुट) और केंद्र व राज्य सरकारों के एकीकृत प्रयासों (Whole of the Government Approach) को दिया।

गृह मंत्री का संकल्प: “हमारी यह मुहिम तब तक जारी रहेगी, जब तक लगभग पांच दशकों से पिछड़े इन नक्सल-मुक्त क्षेत्रों का विकास देश के अन्य विकसित हिस्सों के बराबर नहीं हो जाता।”

इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और छत्तीसगढ़ सरकार के कुशल समन्वय की भी तारीफ की।

सुदृढ़ होता संघीय ढांचा

बैठक के दौरान यह बात उभरकर आई कि मध्य क्षेत्रीय परिषद के चारों राज्यों (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) के बीच अब कोई भी सीमा या प्रशासनिक विवाद शेष नहीं रह गया है। अमित शाह ने बताया कि पिछले एक दशक में क्षेत्रीय परिषदों की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनी है:

समयावधि क्षेत्रीय परिषद की बैठकें स्टैंडिंग कमेटी की बैठकें सुलझाए गए मुद्दे
2004 – 2014 11 बैठकें 14 बैठकें 569 मुद्दों पर चर्चा
2014 – 2026 32 बैठकें 35 बैठकें 1729 मुद्दे (80% का सफल समाधान)

गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि यह क्षेत्र देश के अन्न भंडार, खनिज संपदा, समृद्ध संस्कृति और प्रमुख आस्था केंद्रों का मूल आधार है, जो भारत की प्रगति में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है।

विकास और सामाजिक कल्याण के नए मानक

बैठक में गृह मंत्री ने मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों के सामने भविष्य के विकास का रोडमैप रखा, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

ग्रामीण एवं सामाजिक विकास: राज्य सरकारों को अपना 50% ध्यान ग्रामीण विकास और व्यक्तिगत सशक्तिकरण की योजनाओं पर केंद्रित करना चाहिए।

बुनियादी आवश्यकताएं: ‘जल जीवन मिशन-2’ के तहत हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना, कुपोषण के खिलाफ सामूहिक लड़ाई लड़ना और स्कूलों में ‘ड्रॉपआउट’ दर को कम करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

वित्तीय समावेशन: हर 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सेवाएं सुनिश्चित करना अनिवार्य है, ताकि ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) का लाभ सीधे जनता को मिल सके।

कानून-व्यवस्था और त्वरित न्याय प्रणाली

अमित शाह ने आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक सख्त और संवेदनशील बनाने पर जोर दिया:

गंभीर अपराधों में त्वरित कार्रवाई: पॉक्सो (POCSO) और बलात्कार के मामलों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि के लिए समय पर डीएनए (DNA) जांच सुनिश्चित की जाए।

विशेष अदालतों का गठन: उच्च न्यायालयों से समन्वय कर 5 साल से अधिक पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालतें बनाई जाएं।

साइबर सुरक्षा और मिलावटखोरी: साइबर अपराधों से निपटने के लिए ‘1930 हेल्पलाइन’ को अपडेट किया जाए। साथ ही, मिलावटखोरी के दोषियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं ताकि जनता जागरूक हो सके।

अंत में, गृह मंत्री ने नई न्याय संहिताओं के सफल क्रियान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह देश को नक्सलवाद से मुक्ति मिली है, ठीक उसी तरह वर्ष 2029 से पहले देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को इतना सक्षम बनाना है कि हर आपराधिक मुकदमे का अंतिम फैसला (सुप्रीम कोर्ट तक) 3 साल के भीतर आ जाए।

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