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परमाणु मुद्दे पर अमेरिका-ईरान के बीच सुलह की सुगबुगाहट : ट्रंप ने दिए युद्धविराम के संकेत

वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब हैं। पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने संकेत दिए कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही वार्ता में सकारात्मक प्रगति हो रही है और यदि आवश्यक हुआ, तो मौजूदा संघर्ष विराम (सीजफायर) की अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है।

वार्ता में प्रगति और मुख्य उद्देश्य

ट्रंप के अनुसार, ईरान अब उन शर्तों पर विचार करने के लिए तैयार दिख रहा है, जिन्हें उसने दो महीने पहले सिरे से खारिज कर दिया था। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर पाए। उन्होंने जोर देकर कहा:

“परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए एक गंभीर संकट साबित होगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी समझौते के तहत उनकी परमाणु क्षमताएं सीमित रहें।”

आर्थिक दबाव का असर

राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनके द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक और सैन्य प्रतिबंधों के कारण ही तेहरान बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों ने ईरान की आर्थिक शक्ति को काफी कमजोर कर दिया है, जिसका सकारात्मक असर अब वैश्विक तेल कीमतों और शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य देशों की भूमिका

ईरान के अलावा, ट्रंप ने मध्य पूर्व के अन्य संकटों पर भी अपनी राय रखी:

इजरायल-लेबनान विवाद: उन्होंने इजरायल और लेबनान के बीच चल रही बातचीत को लेकर उत्साह जताया। खबर है कि हिजबुल्लाह को शामिल करते हुए एक सप्ताह के युद्धविराम का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

भारत के साथ संबंध: ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हालिया चर्चा को बेहद ‘शानदार’ बताया और भारतीय प्रधानमंत्री के कार्यों की प्रशंसा की।

यूक्रेन संकट: यूक्रेन के मुद्दे पर उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वहां जनहानि हो रही है, लेकिन वर्तमान में अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता ईरान के साथ डील फाइनल करना है।

आलोचनाओं पर रुख

ईरान के प्रति अपने सख्त रुख को लेकर पोप द्वारा की गई टिप्पणियों पर ट्रंप ने दो-टूक कहा कि पोप को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन वह उनसे असहमत हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक सुरक्षा के लिए ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाना अनिवार्य है।

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