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तमिलनाडु चुनाव 2026 : क्या द्रविड़ किलों में सेंध लगा पाएंगे ‘थलपति’ विजय?

चेन्नई (एजेंसी)। महीनों तक चले तूफानी चुनाव प्रचार और राजनीतिक रस्साकशी के बाद आज तमिलनाडु की किस्मत का फैसला होने जा रहा है। राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर आज मतदान शुरू हो चुका है। इस बार का मुकाबला केवल दो पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच नहीं, बल्कि एक त्रिकोणीय संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) ने चुनावी समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है।

मतदान का विवरण और सुरक्षा व्यवस्था

आज सुबह 7:00 बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो शाम 6:00 बजे तक जारी रहेगी। राज्य के लगभग 5.67 करोड़ मतदाता आज उम्मीदवारों के भविष्य का चुनाव करेंगे। प्रशासन ने निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं:

सुरक्षा बल: 1.20 लाख पुलिस कर्मियों की तैनाती।

चुनाव कर्मी: 3.40 लाख सरकारी कर्मचारी चुनावी ड्यूटी पर।

मतगणना: चुनाव के परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

चुनावी समीकरण: सत्ता की रेस में कौन?

वर्तमान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK अपने ‘द्रविड़ मॉडल’ और जन कल्याणकारी योजनाओं के दम पर सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है। वहीं, ई.के. पलानीस्वामी की अगुवाई वाली AIADMK ने भाजपा के साथ गठबंधन कर सत्ता विरोधी लहर का लाभ उठाने की रणनीति बनाई है।

हालांकि, इस बार सबसे ज्यादा चर्चा विजय की TVK को लेकर है। पहली बार चुनावी मैदान में उतरी यह पार्टी युवाओं और शहरी मतदाताओं को अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रही है, जिससे पारंपरिक द्रविड़ दलों के वोट बैंक में सेंध लगने की संभावना है।

चुनाव आयोग के आंकड़े

मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक के अनुसार, इस बार मतदाताओं की कुल संख्या 5.73 करोड़ से अधिक है। विशेष रूप से:

महिला मतदाता: लगभग 2.93 करोड़

पुरुष मतदाता: लगभग 2.80 करोड़

नए मतदाता (18-19 वर्ष): 14.59 लाख से अधिक युवा पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

प्रमुख मुद्दे और आरोप-प्रत्यारोप

चुनाव प्रचार के दौरान डीएमके ने इसे “राज्य के अधिकारों की रक्षा” का चुनाव बताया है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने ‘द्रविड़ मॉडल 2.0’ का नारा देते हुए केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोला। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए AIADMK को भाजपा की बी-टीम करार दिया।

करूर जैसे संवेदनशील जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और फ्लाइंग स्क्वॉड की पैनी नजर हर गतिविधि पर बनी हुई है। अब देखना यह है कि क्या तमिलनाडु की जनता अपने पारंपरिक द्रविड़ प्रेम को बरकरार रखती है या किसी नए ‘नायक’ को सत्ता की चाबी सौंपती है।

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