टॉप न्यूज़

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता : क्या नई बाधाओं के बीच निकलेगा समाधान?

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर आज, 20 अप्रैल से वॉशिंगटन डीसी में एक निर्णायक चर्चा शुरू हो रही है। तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक में भारतीय दल की कमान वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन संभाल रहे हैं, जिसमें सीमा शुल्क (Customs) और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

क्यों दोबारा चर्चा की पड़ी जरूरत?

दोनों देशों के बीच बातचीत एक ऐसे मोड़ पर रुकी थी जहाँ अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क (Tariff) को 50% से घटाकर 18% करने के लिए तैयार था। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा 24 फरवरी से सभी देशों के आयात पर 10% का अस्थायी टैरिफ लगाने के फैसले ने समीकरण बदल दिए हैं।

अब भारत को मिलने वाला विशेष लाभ अन्य देशों के मुकाबले कम हो गया है, जिसके कारण पुरानी शर्तों पर फिर से मंथन करना अनिवार्य हो गया है।

विवाद के मुख्य बिंदु: धारा 301 और कृषि शुल्क

वार्ता की मेज पर केवल टैरिफ ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य पेचीदा मुद्दे भी हैं:

सेक्शन 301 की जांच: अमेरिका ने भारत की कुछ व्यापार नीतियों को ‘अनुचित’ बताते हुए धारा 301 के तहत जांच शुरू की है। भारत इन आरोपों को खारिज करते हुए इस जांच को समाप्त करने की मांग कर रहा है।

अमेरिकी सेब का गिरता बाजार: अमेरिका के लिए सेब पर लगा 50% आयात शुल्क एक बड़ा मुद्दा है। आंकड़ों के अनुसार, 2018 में भारत के कुल सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 53% थी, जो अब सिमटकर मात्र 8.5% रह गई है। इस बीच तुर्की, ईरान और अफगानिस्तान जैसे देशों ने भारतीय बाजार में अपनी जगह मजबूत कर ली है।

प्रस्तावित सौदे की झलक

इस समझौते को संतुलित बनाने के लिए दोनों देशों ने कुछ रियायतों के संकेत दिए हैं:

क्षेत्र,भारत की ओर से संभावित रियायत,अमेरिका की ओर से मांग/रुचि

कृषि उत्पाद,”सोयाबीन तेल, ड्राई फ्रूट्स और फलों पर कम टैरिफ”,भारतीय बाजार तक आसान पहुंच (Market Access)
अन्य सामान,”वाइन, स्पिरिट्स और पशु आहार पर शुल्क कटौती”,निर्यात के बेहतर अवसर
भारत का निवेश,”ऊर्जा, एविएशन और टेक्नोलॉजी में भारी निवेश”,अगले 5 वर्षों में $500 अरब का आयात लक्ष्य

चुनौतियां और भविष्य की राह

वर्तमान में कृषि क्षेत्र सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका अपने उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अधिक छूट चाहता है।

अब सवाल यह है कि क्या वाशिंगटन में होने वाली यह तीन दिवसीय बैठक आपसी मतभेदों को दूर कर पाएगी? भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपने घरेलू किसानों के हितों की रक्षा करते हुए अमेरिका के साथ एक ऐसा ‘विन-विन’ (Win-Win) समझौता कर सके, जो बदलते वैश्विक टैरिफ नियमों के बीच भी फायदेमंद बना रहे।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button