मध्यप्रदेश

आरक्षण पर उमा भारती के तीखे तेवर, स्कूली किताबों में शामिल होगी राजा हिरदेशाह लोधी की शौर्य गाथा

भोपाल (एजेंसी)। भोपाल के जम्बूरी मैदान में आयोजित राजा हिरदेशाह लोधी के ‘शौर्य सम्मेलन’ के दौरान मध्य प्रदेश की राजनीति के दो महत्वपूर्ण पहलू सामने आए। एक ओर जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आरक्षण के मुद्दे पर विरोधियों को ललकारा, वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महान स्वतंत्रता सेनानी राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान को सम्मान देने के लिए बड़ी घोषणाएं कीं।

“आरक्षण कोई नहीं छीन सकता” – उमा भारती

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आरक्षण के समर्थन में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारतीय समाज में गहराई तक व्याप्त जातिगत और आर्थिक विषमताओं को दूर करने के लिए आरक्षण एक अनिवार्य व्यवस्था है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“जब तक देश के सर्वोच्च पदों (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश) पर बैठे व्यक्तियों के बच्चे और एक निर्धन परिवार का बच्चा एक ही स्कूल में शिक्षा प्राप्त नहीं करेंगे, तब तक दुनिया की कोई ताकत आरक्षण को समाप्त नहीं कर सकती।”

उन्होंने राजा हिरदेशाह लोधी की युद्ध कौशल की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से करते हुए बुंदेलखंड के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।

पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेंगे ‘नर्मदा टाइगर’

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। उन्होंने घोषणा की कि ‘नर्मदा टाइगर’ के नाम से विख्यात राजा हिरदेशाह के संघर्ष और वीरता को मध्य प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।

मुख्यमंत्री द्वारा की गई प्रमुख घोषणाएं:

शिक्षा में स्थान: राजा हिरदेशाह की जीवनी को स्कूल की किताबों में पढ़ाया जाएगा।

तीर्थ स्थल का निर्माण: नर्मदा तट पर स्थित हीरापुर में उनकी स्मृति में एक भव्य तीर्थ स्थल बनाया जाएगा।

ऐतिहासिक शोध: राज्य सरकार उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं और स्वतंत्रता संग्राम पर गहन शोध कार्य करवाएगी।

कौन थे राजा हिरदेशाह लोधी?

राजा हिरदेशाह 19वीं सदी के एक पराक्रमी योद्धा थे, जिन्होंने 1842 के ‘बुंदेलखंड विद्रोह’ का नेतृत्व किया था। उन्होंने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध बुंदेला, लोधी और गोंड समुदायों को एकजुट कर एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया। 1858 तक चले इस लंबे संघर्ष में उन्होंने और उनके परिवार के कई सदस्यों ने मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी और विधायक जालम सिंह पटेल ने भी राजा हिरदेशाह के ऐतिहासिक बलिदान को याद करते हुए समाज के लिए उनकी प्रेरणा को रेखांकित किया।

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