सुशासन तिहार की शुरुआत : जनभागीदारी से स्वच्छता श्रमदान और जल संरक्षण को मिला बढ़ावा

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन तिहार 2026’ का भव्य आगाज हुआ है। इस आयोजन का मुख्य केंद्र-बिंदु प्रदेश भर में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जल संरक्षण के टिकाऊ उपायों को बढ़ावा देना है। इस अनूठी पहल का एक उदाहरण जशपुर जिले के खूंटीटोली ग्राम पंचायत में देखने को मिला, जहाँ सामूहिक श्रमदान के जरिए स्वच्छता और जल संवर्धन का संदेश दिया गया।
सामूहिक प्रयासों से बदलाव की ओर
इस कार्यक्रम में केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भी पूरी तत्परता के साथ शामिल हुए। गाँव के विभिन्न हिस्सों में सफाई अभियान चलाकर यह संदेश दिया गया कि एक स्वस्थ और स्वच्छ समाज के निर्माण के लिए हर नागरिक का योगदान आवश्यक है। श्रमदान के जरिए लोगों ने स्वच्छता को केवल सरकारी कार्य नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
‘जल संचय जनभागीदारी 2.0’ और ‘5 प्रतिशत मॉडल’
सुशासन तिहार के दौरान ‘जल संचय जनभागीदारी 2.0’ अभियान के तहत ‘5 प्रतिशत मॉडल’ पर विशेष जोर दिया गया। यह तकनीक ग्रामीण इलाकों में जल संकट से निपटने के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रही है। इस मॉडल की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
वर्षा जल संचयन: किसान अपने खेतों के लगभग 5 प्रतिशत हिस्से को सीढ़ीनुमा गड्ढों के रूप में विकसित करते हैं।
भूजल में सुधार: इन गड्ढों में बारिश का पानी जमा होने से भूजल स्तर (Groundwater Level) में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
सिंचाई की सुविधा: संचित जल का उपयोग खेती के लिए किया जाता है, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध होता है।
जन आंदोलन की दिशा में एक कदम
कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों ने ग्रामीणों को इस मॉडल के दीर्घकालिक आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। यह बताया गया कि कैसे छोटे-छोटे सामुदायिक प्रयासों से जल संकट जैसी बड़ी चुनौतियों को हल किया जा सकता है।
सुशासन तिहार के माध्यम से राज्य सरकार पूरे छत्तीसगढ़ में स्वच्छता और जल संरक्षण को एक ‘जन आंदोलन’ में बदलने का प्रयास कर रही है। हर गाँव-गाँव में इस तरह के आयोजन न केवल लोगों को जागरूक कर रहे हैं, बल्कि उन्हें विकास कार्यों में सक्रिय भागीदार भी बना रहे हैं।
















